देहरादून में कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के शंख को लेकर दिए गए बयान पर सवाल उठाए हैं। बद्रीनाथ धाम में डीजे और सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शंख बजाने की परंपरा और उसके धार्मिक महत्व तक पहुंच गया है। धस्माना ने कहा कि मंत्री को इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने और मंत्री से अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।
शंख को लेकर धस्माना ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि शंख हड्डी नहीं है। उनके अनुसार शंख समुद्री जीव घोंघे का बाहरी खोल होता है, जो कैल्शियम कार्बोनेट से बना होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री को विज्ञान और सनातन परंपरा, दोनों की जानकारी नहीं है। धस्माना का कहना था कि इस तरह के संवेदनशील विषय पर बयान देते समय तथ्यों और परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
बाइट – सूर्यकांत धस्माना, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने बद्रीनाथ धाम में शंख को लेकर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के दिए गए बयान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शंख हड्डी नहीं है, बल्कि समुद्री जीव घोंघे का बाहरी खोल है, जो कैल्शियम कार्बोनेट से बना होता है।
धस्माना ने आरोप लगाया कि मंत्री को विज्ञान और सनातन परंपरा, दोनों की जानकारी नहीं है। उनका कहना था कि इस तरह के संवेदनशील धार्मिक विषय पर बयान देते समय तथ्यों और परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम में शंख न बजाने की परंपरा धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं से जुड़ी है। धस्माना के अनुसार बद्रीनाथ ध्यान, योग और तपस्या का धाम है, इसलिए यहां शांत वातावरण बनाए रखने की परंपरा रही है। उन्होंने पौराणिक मान्यता का हवाला देते हुए कहा कि माता लक्ष्मी के शंख में निवास करने और भगवान विष्णु की सेवा में रहने के कारण भी यहां शंख नहीं बजाया जाता।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि बद्रीनाथ जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में तेज आवाज वाले डीजे और म्यूजिक सिस्टम के जरिए कार्यक्रम आयोजित किए गए। उनके मुताबिक इससे धार्मिक मर्यादा और पर्यावरण से जुड़े सवाल खड़े होते हैं।
धस्माना ने मांग की कि सरकार इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे और सतपाल महाराज अपने बयान पर स्पष्टीकरण दें।
धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है परंपरा
धस्माना ने कहा कि बद्रीनाथ धाम में शंख न बजाने की परंपरा का संबंध धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं से है। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ ध्यान, योग और तपस्या का धाम है। इसी कारण यहां शांत वातावरण बनाए रखने की परंपरा रही है।
पौराणिक मान्यता का हवाला
कांग्रेस नेता ने पौराणिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा कि माता लक्ष्मी के शंख में निवास करने और भगवान विष्णु की सेवा में रहने के कारण भी बद्रीनाथ में शंख नहीं बजाया जाता। उनके अनुसार यह परंपरा आस्था से जुड़ी है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।
डीजे और म्यूजिक सिस्टम पर आपत्ति
धस्माना ने आरोप लगाया कि बद्रीनाथ जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में तेज आवाज वाले डीजे और म्यूजिक सिस्टम के जरिए कार्यक्रम आयोजित किए गए। उनका कहना था कि इससे धार्मिक मर्यादा और पर्यावरण से जुड़े सवाल खड़े होते हैं।
सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग
उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सतपाल महाराज से अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। इस मामले में अब तक सरकार या मंत्री की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट: आकाश, देहरादून
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