कानपुर। कानपुर कमिश्नरेट की साइबर क्राइम पुलिस ने ईडी और सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों वासु, आतिश कुमार और कंचन प्रजापति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह का मास्टरमाइंड मुकुल चौबे फरार है और उसे मामले में वांछित किया गया है।
ईडी और सीबीआई अधिकारी बनकर करते थे ठगी
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य पहले खुद को ईडी का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित से बातचीत करते थे। इसके बाद कॉल अपने साथी को ट्रांसफर कर दी जाती थी, जो खुद को सीबीआई अधिकारी बताता था। वह पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट करने, मुकदमे में फंसाने और परिवार को नुकसान पहुंचाने का डर दिखाता था। इसके बाद पीड़ित से बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करा ली जाती थी।
स्वरूपनगर के वरिष्ठ चिकित्सक से 48 लाख की ठगी
पुलिस के अनुसार इसी तरीके से स्वरूपनगर निवासी वरिष्ठ चिकित्सक योगेश चंद्र मिश्रा को भी निशाना बनाया गया। सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बनकर बातचीत करते हुए आरोपियों ने चिकित्सक से करीब 48 लाख रुपये की ठगी की। ठगी की रकम को इसके बाद दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
बाइट डीसीपी क्राइम अरीबा नोमान
कानपुर की डीसीपी क्राइम अरीबा नोमान ने डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में पुलिस की कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर क्राइम पुलिस ने ईडी और सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह का मास्टरमाइंड मुकुल चौबे फरार है और उसकी तलाश जारी है। डीसीपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल से डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं, जिनकी वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि ऐसी किसी भी कॉल पर घबराएं नहीं और तुरंत पुलिस को सूचना दें।
फर्जी दस्तावेज और फर्जी फर्म से खुलवाया बैंक खाता
जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने आधार और पैन कार्ड में कूटरचना कर खुद को प्रतापगढ़ का निवासी दर्शाया। इसके बाद BAUKOYO CONTRACTORS PRIVATE LIMITED नाम से फर्जी फर्म रजिस्टर कराकर बैंक खाता खुलवाया गया। पुलिस के मुताबिक इस खाते में 15 ट्रांजेक्शन के जरिए 25.98 लाख रुपये जमा कराए गए। रकम को उसी दिन देश के अलग-अलग राज्यों के 611 बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
एनसीआरपी पोर्टल पर मिलीं चार शिकायतें
एनसीआरपी पोर्टल पर जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े खातों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों से चार साइबर अपराध शिकायतें मिलीं। पुलिस के अनुसार इन शिकायतों में करीब 1.42 करोड़ रुपये की अनुमानित साइबर ठगी सामने आई है।
मास्टरमाइंड मुकुल चौबे की तलाश
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और अब तक मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मुकुल चौबे की भूमिका सामने आई है। पुलिस ने उसे मामले में वांछित किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुकुल के खिलाफ कानपुर के अलग-अलग थानों में पहले भी कई मुकदमे दर्ज हैं।
मोबाइल से मिले अहम डिजिटल साक्ष्य
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन से आपराधिक कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट और साइबर अपराध से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल सामग्री बरामद हुई है। पुलिस मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच करा रही है। साथ ही मुकुल चौबे समेत गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश और इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जांच की जा रही है।
सावधान रहें: डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं
कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती। ऐसी कॉल आने पर घबराएं नहीं, किसी को पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस को सूचना दें।
रिपोर्टर: सुनील कुमार, कानपुर
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