गोंडा/करनैलगंज। बारिश के बाद करनैलगंज रेलवे स्टेशन के आसपास रेलवे लाइन के किनारे बसे गांवों में जलभराव की समस्या गंभीर होती जा रही है। रिसाला, भीम्भा पुरवा, कुन्नू पुरवा और हटही गांव में कई स्थानों पर पानी जमा होने से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई घरों के आसपास पानी भरने के साथ कुछ स्थानों पर पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, लगातार बारिश के बाद रेलवे लाइन के आसपास पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। इसके चलते गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे की तीसरी लाइन के निर्माण के दौरान पहले से मौजूद जल निकासी के रास्ते प्रभावित हुए, जिसके बाद बारिश का पानी आसानी से बाहर नहीं निकल पा रहा है।
रेलवे गेट संख्या 281 के पास जल निकासी को लेकर ग्रामीणों की शिकायत
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे गेट संख्या 281 के पास पहले पानी की निकासी के लिए पुलिया और रास्ता मौजूद था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, तीसरी रेलवे लाइन के निर्माण के दौरान जल निकासी की व्यवस्था में बदलाव हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद बारिश के पानी की निकासी प्रभावित हुई और आसपास के गांवों में पानी जमा होने लगा।
हालांकि, रेलवे निर्माण और जल निकासी व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित रेलवे अधिकारियों का पक्ष इस खबर को तैयार किए जाने तक सामने नहीं आया है। प्रशासन और रेलवे की ओर से आधिकारिक स्थिति सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।
घरों और रास्तों तक पहुंचा पानी
जलभराव के कारण ग्रामीणों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कई स्थानों पर घरों के आसपास पानी जमा होने से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल जाने में भी दिक्कत हो रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक, घरों में पानी पहुंचने की वजह से घरेलू सामान को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव वाले इलाकों में परिवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।
जहरीले जीव-जंतुओं का भी डर
ग्रामीणों ने बताया कि पानी जमा होने के बाद कई स्थानों पर सांप और अन्य जीव-जंतु दिखाई देने लगे हैं। इससे खासकर बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवार चिंतित हैं। ग्रामीणों की मांग है कि केवल जमा पानी को निकालना ही नहीं, बल्कि भविष्य में बारिश के दौरान दोबारा ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्थायी जल निकासी की व्यवस्था की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पानी की निकासी के लिए पर्याप्त रास्ता उपलब्ध हो जाए तो बारिश के बाद पैदा होने वाली समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और रेलवे से की तत्काल कार्रवाई की मांग
जलभराव से परेशान ग्रामीण अब प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कराने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर जलभराव की वास्तविक स्थिति देखें और पानी की निकासी के लिए तत्काल कदम उठाएं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे लाइन के निर्माण के समय जल निकासी की समस्या को लेकर उन्हें समाधान का भरोसा दिया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। लगातार जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ रही है और बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जल निकासी के पुराने रास्तों की स्थिति की जांच कराई जाए और जरूरत के अनुसार पुलिया, नाली या अन्य उचित व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश का पानी गांवों में जमा न हो।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की कार्रवाई पर है। जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होने से ही रेलवे लाइन के किनारे बसे इन गांवों के लोगों को लंबे समय तक राहत मिल सकेगी।
रिपोर्टर: रितेश गुप्ता