राजस्थान के नागौर जिले की राजनीति में मंगलवार को नगर परिषद के उपसभापति चुनाव ने नया मोड़ ला दिया। एक दिन पहले जिस भाजपा ने सभापति पद के चुनाव में 55 वोट हासिल कर अपनी ताकत दिखाई थी, उसी नगर परिषद में उपसभापति पद के चुनाव में पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। निर्दलीय प्रत्याशी मोहम्मद शरीफ कुरैशी ने भाजपा उम्मीदवार शिवकुमार उर्फ मीकू राव को पांच वोटों के अंतर से हरा दिया।
उपसभापति पद के लिए हुए मतदान में शरीफ कुरैशी को 32 वोट, जबकि भाजपा प्रत्याशी शिवकुमार उर्फ मीकू राव को 27 वोट मिले। एक वोट खारिज हुआ। इस तरह 60 सदस्यीय नागौर नगर परिषद में शरीफ कुरैशी ने जीत दर्ज कर उपसभापति का पद अपने नाम कर लिया।
सभापति चुनाव में BJP को मिले थे 55 वोट
नागौर नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। 2026 के निकाय चुनाव में किसी एक पार्टी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला था। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार भाजपा के 21, निर्दलीय 23, कांग्रेस के 15 और RLP के एक पार्षद ने जीत दर्ज की थी। यानी निर्दलीय पार्षदों की संख्या भाजपा से भी ज्यादा रही।
इसके बावजूद 21 सितंबर को हुए सभापति चुनाव में भाजपा की संतोष टांक को 55 वोट मिले और उन्होंने सभापति पद हासिल किया। कांग्रेस प्रत्याशी को सिर्फ पांच वोट मिले। इस परिणाम के बाद माना गया कि भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के जरिए बोर्ड में मजबूत स्थिति बना ली है।
लेकिन अगले ही दिन उपसभापति चुनाव में तस्वीर बदल गई। भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के सामने निर्दलीय शरीफ कुरैशी ने 32 वोट हासिल कर जीत दर्ज कर ली।
पांच वोट से जीते शरीफ कुरैशी
उपसभापति चुनाव में कुल 60 पार्षदों के बीच मतदान हुआ। मतगणना के बाद शरीफ कुरैशी के खाते में 32 वोट आए, जबकि भाजपा के शिवकुमार उर्फ मीकू राव को 27 वोट मिले। एक मत निरस्त कर दिया गया।
इस तरह जीत और हार के बीच पांच वोट का अंतर रहा। खास बात यह रही कि सभापति चुनाव में भाजपा को मिले 55 वोटों के मुकाबले अगले दिन उसके उपसभापति प्रत्याशी को केवल 27 वोट मिले। इससे स्थानीय निकाय के भीतर मतदान के दौरान बने अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है।
निर्दलीय पार्षदों की भूमिका हुई अहम
नागौर नगर परिषद के चुनाव परिणामों ने शुरुआत से ही निर्दलीय पार्षदों को महत्वपूर्ण स्थिति में रखा था। 60 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल की थीं। अलग-अलग स्रोतों के अनुसार अंतिम आंकड़ों में निर्दलीयों के खाते में 23 सीटें आईं, जबकि भाजपा को 21 और कांग्रेस को 15 सीटें मिलीं। एक सीट RLP के खाते में गई।
ऐसे में सभापति और उपसभापति के चुनाव में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण रहा। सभापति चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को बड़ी संख्या में समर्थन मिला, जबकि उपसभापति चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को पीछे छोड़ दिया।
यही वजह है कि नागौर नगर परिषद का उपसभापति चुनाव स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
जीत के बाद लगाए गए मोदी और भजनलाल के नारे
शरीफ कुरैशी की जीत के बाद उनके समर्थकों ने विजय जुलूस निकाला। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम के नारे भी लगाए गए।
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, जीत के बाद मीडिया से बातचीत में शरीफ कुरैशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में वह शहर के विकास के लिए काम करेंगे। उन्होंने नागौर के विकास को अपनी प्राथमिकता बताया।
यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि चुनाव में शरीफ कुरैशी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की है, जबकि उनके समर्थन में मतदान करने वाले पार्षदों का समीकरण सभापति चुनाव से अलग दिखाई दिया।
मुंडवा में भी बदला था चुनावी गणित
नागौर जिले में स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान मुंडवा नगर पालिका में भी ऐसा ही एक अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिला। वहां भाजपा के पास 10 पार्षद थे, लेकिन अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी की प्रत्याशी गीता देवी को एक भी वोट नहीं मिला। कांग्रेस और RLP के समर्थन से अलका कंदोई ने 13 वोट हासिल किए और एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
इन घटनाओं से नागौर जिले के निकाय चुनावों में पार्षदों की भूमिका और स्थानीय स्तर पर बनने वाले गठजोड़ चर्चा में आ गए हैं।
नागौर में अब बोर्ड की राजनीति पर नजर
सभापति पद भाजपा के पास जाने और उपसभापति पद निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में आने के बाद अब नागौर नगर परिषद के कामकाज पर नजर रहेगी। 60 सदस्यीय परिषद में अलग-अलग दलों और निर्दलीय पार्षदों की मौजूदगी के कारण बोर्ड में निर्णय लेने के दौरान राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण रह सकते हैं।
नागौर के निकाय चुनाव परिणामों ने यह भी दिखाया है कि वार्ड चुनाव में मिले सीटों के आंकड़े और बाद में होने वाले सभापति या उपसभापति चुनाव के परिणाम एक जैसे नहीं होते। इन पदों के चुनाव में पार्षदों के समर्थन से अंतिम परिणाम बदल सकता है।
फिलहाल नागौर नगर परिषद में सभापति पद भाजपा की संतोष टांक के पास है, जबकि उपसभापति पद निर्दलीय मोहम्मद शरीफ कुरैशी ने हासिल किया है। दोनों चुनावों के बीच सामने आए अलग-अलग मतदान आंकड़ों ने स्थानीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
ये भी पढ़ें: यूपी पुलिस में बड़ा फेरबदल, 18 IPS अधिकारियों का तबादला, देखें पूरी लिस्ट