चितवन में सबसे ज्यादा तबाही, हजारों लोग अब भी बेपता, राहत दल दिन-रात जुटे तलाश में
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने अब तक का सबसे भयावह रूप ले लिया है। जैसे-जैसे राहत और बचाव दल दुर्गम इलाकों तक पहुंच रहे हैं, वैसे-वैसे मौत का आंकड़ा लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक, इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या अब एक हजार के पार जा चुकी है, और सबसे भयावह तबाही चितवन जिले में देखने को मिली है।
पुलिस के आंकड़ों में सामने आई भयावहता
नेपाल पुलिस द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार दोपहर तक कुल 1,058 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें 30 बालक, 35 बालिकाएं, 232 महिलाएं और 371 पुरुष शामिल हैं, जबकि 390 मामले ऐसे हैं जिनमें केवल आंशिक मानव अंग ही मिल सके हैं। इनमें से 972 शवों की कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम और मुचुल्का प्रक्रिया संपन्न कराई जा रही है।
लापता लोगों की तादाद अब भी चिंताजनक
बीते 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने तथा हिमस्खलन के चलते अचानक आई इस प्रलयकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। नेपाल पुलिस के मुताबिक अब भी 4,606 लोगों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, जो बचाव अभियान की सफलता का संकेत भी है।
चितवन बना सबसे बड़ा त्रासदी केंद्र
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की रिपोर्ट के अनुसार अब तक सबसे अधिक शव चितवन जिले से निकाले गए हैं, जिनकी संख्या 321 बताई गई है। इसके अलावा नवलपरासी ईस्ट क्षेत्र से 216, नवलपरासी वेस्ट से 170, नुवाकोट से 95, गोरखा से 65, धाडिंग से 57, रसुवा से 41 और तनहुन जिले से 38 शव बरामद हुए हैं। दुखद पहलू यह भी है कि 684 शवों की पहचान अब तक नहीं हो पाई, जिन्हें प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया के तहत दफना दिया है।
भारत की टनल रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा
इस भीषण संकट के बीच पड़ोसी देश भारत भी मदद के लिए आगे आया है। भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम ने नेपाली सेना के साथ मिलकर अहम हाइड्रोपावर टनल स्थलों पर संयुक्त खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार एक हाइड्रोपावर साइट से हाल ही में कुल 15 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें पांच चीनी और सात भारतीय नागरिक शामिल थे।
आगे की चुनौती
नेपाल सरकार और राहत एजेंसियों के सामने अब भी सबसे बड़ी चुनौती लापता हजारों लोगों तक पहुंचना और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है और नदियों का जलस्तर सामान्य हो रहा है, आशंका है कि मृतकों का आंकड़ा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन, सेना और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल मिलकर राहत कार्य को तेज करने में जुटे हैं।