8Gorakhpur-भारत की आजादी के बाद हुए पहले तीन चुनाव में जहां कांग्रेस ने पूरे देश में कांग्रेस की लहर में गोरखपुर में भी अपना विजय परचम लहराया , परंतु 1967 में कांग्रेस के अंतविरोध तथा 1975 की इमरजेंसी ने कांग्रेस के यहां से पैर उखाड़ दिए । 1975 में गोरक्षनाथ पीठ के महंत दिग्विजय नाथ ने सिंबल लाल सक्सेना को रिकार्ड मतों से पराजित कर पहली बार सीट पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई पर इमरजेंसी की हार के बाद से बौखलाई इंदिरा गांधी ने दोबारा नई रणनीति के तहत अगले चुनाव में कांग्रेस से नरसिंह नारायण को प्रत्याशी बनाकर फिर से गोरखपुर सीट पर अपना कब्जा जमा लिया । 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के पक्ष में पूरे देश में सहानुभूति की लहर दौड़ पड़ी जिसका फायदा कांग्रेस को गोरखपुर सीट पर भी मिला और कांग्रेस प्रत्याशी मदन पांडे ने एक बार फिर गोरखपुर में कांग्रेस के नाम पर यहां पर जीत दर्ज की ।
परंतु 1989 में नवमी लोकसभा के चुनाव से पहले यहां की राजनीतिक दिशा बदलने लगी यह वह समय था जब राम मंदिर आंदोलन जोरों पर था और लोग एवं पूरे देश में राम समर्थन की एक लहर चल रही थी हिंदुत्व की इस लहर में गोरक्षनाथ पीठ की सक्रियता भी बढ़ गई और लोगों में पीठ के प्रति समर्थन बढ़ने लगा जिसका असर यह हुआ की सोशलिस्टों की लहर के बावजूद महेंद्र अवेद्यनाथ अखिल भारतीय हिंदू महासभा के टिकट पर जनता दल प्रत्याशी राम सिंह को हराकर पहली बार लोकसभा पहुंचे। इसके बाद इस जीत के क्रम को लगातार बरकरार रखते हुए 1996 में भी उन्होंने सीट पर अपना परचम लहराया तथा यह सिद्ध कर दिया कि लोगों का विश्वास और लोगों की आस्था सिर्फ गोरक्षनाथ पीठ से है ।
योगी युग की शुरुआत …
1989 से मिले जनता के आशीर्वाद और गोरक्षनाथ भरोसा पर भरोसे को कायम रखते हुए 1996 में भी जीत का यह क्रम जारी रहा इसके साथ ही 1998 में योगी युग की शुरुआत हुई 1998 में महंत अवेद्यनाथ ने अपनी राजनीतिक विरासत अपने उत्तराधिकारी महंत योगी आदित्यनाथ को सौंपी । जैसा हम पाठकों को बता रहे हैं की 1998 के बाद से एक नए युग की शुरुआत हुई जिसे योगी योग भी कह सकते हैं लगातार पांच बार सांसद बनकर योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षनाथ पीठ के प्रभाव को सीट पर इतना मजबूत कर दिया कि लोकसभा से लेकर विधानसभा हर तरफ भारतीय जनता पार्टी का डंका बचता रहा ।
2018 उपचुनाव अपवाद…
1989 से शुरू हुई जीत का सिलसिला एवं गोरक्षनाथ पीठ का भरोसा गोरखपुर की जनता पर सर चढ़कर बोलता रहा । 2017 में हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रदेश में अपना परचम लहराया और मुख्यमंत्री के तौर पर गोरक्षनाथ पीठ के महंत ,पांच बार के सांसद योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए उन्हें देश के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जिसकी वजह से उन्हें अपनी लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा और 2018 में गोरखपुर में उपचुनाव हुआ ।2018 में हुआ यह उपचुनाव अपवाद रहा जिसमें सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद ने भाजपा के उपेंद्र दत्त शुक्ला को हरा दिया । परंतु फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के साथ-साथ अपनी इस परंपरागत सीट पर विशेष ध्यान दिया जिसके फलस्वरुप 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से रवि किशन गोरक्षनाथ पीठ के आशीर्वाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल राजनीतिक नेतृत्व से इस सीट पर जीतकर दिल्ली पहुंचे आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में भी रवि किशन को ही भारतीय जनता पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है अब 4 जून 2024 को नतीजे बताएंगे कि 2019 से सांसद रवि किशन जनता की उम्मीद पर कितना खरे उतरे हैं ।
Also Read: रायबरेली से डॉ कुमार विश्वास को प्रत्याशी बनाकर भाजपा कर सकती है