इज़राइल ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा है कि उसने ईरान ट्रंप हत्या साजिश को लेकर अमेरिका को पहले ही आगाह कर दिया था। इज़राइली खुफिया एजेंसी के मुताबिक, ईरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जान लेने के लिए कई मंसूबे बना रहा था — जिनमें स्नाइपर से निशाना बनाना, चाकू से हमला करना और यहां तक कि कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल का इस्तेमाल तक शामिल था। ये चेतावनियां अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को और कुछ मामलों में सीधे व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों तक भेजी गईं। इनमें सबसे गंभीर चेतावनी जुलाई में नाटो शिखर सम्मेलन के लिए ट्रंप की तुर्की यात्रा से ठीक पहले आई थी।
हालांकि इन खतरों की पूरी तरह पुष्टि नहीं हो सकी थी, फिर भी व्हाइट हाउस और सीक्रेट सर्विस ने कोई जोखिम नहीं उठाया। यात्रा के दौरान ट्रंप को ‘एयर फ़ोर्स वन’ से हटाकर सुरक्षा के लिहाज से दूसरे विमान में ले जाया गया।
जुलाई में मिली थी सबसे बड़ी चेतावनी
सूत्रों के अनुसार, ईरान ट्रंप हत्या साजिश से जुड़ी सबसे अहम जानकारी जुलाई में अंकारा में हुए नाटो शिखर सम्मेलन से पहले सामने आई थी। इज़राइली अधिकारियों ने व्हाइट हाउस को सतर्क किया था कि ईरान ‘एयर फ़ोर्स वन’ में यात्रा के दौरान ट्रंप पर हमला कर सकता है, संभवतः कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के जरिए। इस चेतावनी ने अमेरिकी सुरक्षा तंत्र को अतिरिक्त एहतियात बरतने पर मजबूर कर दिया।
खतरों की पुष्टि नहीं हो सकी, फिर भी नहीं लिया गया जोखिम
तुर्की यात्रा के दौरान सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप को सुरक्षित निकालने के लिए एक अनोखा धोखा देने वाला ऑपरेशन चलाया — उन्हें गुपचुप तरीके से ‘एयर फ़ोर्स वन’ से दूसरे विमान में शिफ्ट किया गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से मानती रही हैं कि ईरान, 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए मिलिट्री कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला ट्रंप से लेना चाहता है। हालांकि CIA पिछले साल से इज़राइली इंटेलिजेंस द्वारा बताए गए इन खास खतरों की पुष्टि अब तक नहीं कर सकी है।
अमेरिका और इज़राइल के आकलन में मतभेद
ईरान के खिलाफ दो अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान, CIA का इज़राइली इंटेलिजेंस पर “कम भरोसा” रहा — खासकर ईरान ट्रंप हत्या साजिश से जुड़ी जानकारियों को लेकर। यह भी साफ नहीं हो पाया कि यह आकलन ट्रंप प्रशासन के भीतर कितना साझा किया गया। इसी बीच, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों में मतभेद उभरे — अमेरिका का मानना था कि ईरान सक्रिय रूप से हथियार नहीं बना रहा, जबकि इज़राइल ने तत्काल खतरे की बात कही। इसके बावजूद ट्रंप ने फरवरी में ईरान पर हमला किया।
तुर्की ने नहीं की पुष्टि
एक तुर्की अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप की तुर्की यात्रा के दौरान बताए गए खतरे की पुष्टि तुर्की की खुफिया एजेंसियों ने स्वतंत्र रूप से नहीं की थी। उनके पास इज़राइल के दावों का समर्थन करने वाला कोई ठोस सबूत नहीं मिला। बावजूद इसके, यह घटना दिखाती है कि तेहरान के साथ बढ़ते तनाव के इस दौर में इज़राइली खुफिया एजेंसी, ट्रंप की सुरक्षा से जुड़े फैसलों को किस हद तक प्रभावित कर रही है।