इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर प्रकाशित एक नई जांच रिपोर्ट के बाद कतर और हमास की फंडिंग से जुड़ा मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। इजरायली अखबार येदिओथ अहरोनोथ (Yedioth Ahronoth) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेतन्याहू को कई मौकों पर चेतावनी दी गई थी कि कतर से आने वाला पैसा हमास के सैन्य ढांचे तक पहुंच रहा है।
रिपोर्ट में इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों और मिस्र की ओर से दी गई कथित चेतावनियों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार की नीतियों और नेतन्याहू की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन आरोपों को खारिज किया है और रिपोर्ट को पुराने दावों को दोहराने वाला बताया है।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
येदिओथ अहरोनोथ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू को 2019 से कई बार यह जानकारी दी गई कि कतर से आने वाली रकम का इस्तेमाल हमास के सैन्य विंग को मजबूत करने में हो रहा है।
रिपोर्ट में कथित तौर पर इजरायली सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों और मिस्र की ओर से दी गई सूचनाओं का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा इजरायली खुफिया तंत्र द्वारा कतर से हमास के सशस्त्र ढांचे तक पहुंचने वाले एक अलग और कथित गुप्त वित्तीय चैनल का भी पता लगाए जाने की बात कही गई है।
रिपोर्ट का दावा है कि इन जानकारियों के बावजूद कतर से गाजा तक वित्तीय सहायता पहुंचाने की व्यवस्था कई वर्षों तक जारी रही। यह रिपोर्ट फिलहाल एक मीडिया जांच के रूप में सामने आई है; इसके सभी दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अलग से जरूरी है।
सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिर्फ एक एजेंसी नहीं, बल्कि इजरायली सुरक्षा तंत्र के अलग-अलग हिस्सों से इस बारे में जानकारी प्रधानमंत्री तक पहुंचाई गई थी। इसमें शिन बेट और सैन्य खुफिया से जुड़ी चेतावनियों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र की ओर से भी नेतन्याहू को कतर की आर्थिक सहायता के हमास के सैन्य ढांचे तक पहुंचने को लेकर आगाह किया गया था। इस दावे के सामने आने के बाद सवाल यह उठ रहा है कि उस समय इजरायल की नीति क्या थी और सरकार ने कतर की वित्तीय सहायता को किस उद्देश्य से जारी रहने दिया।
नेतन्याहू के कार्यालय ने क्या कहा?
रिपोर्ट सामने आने के बाद नेतन्याहू के प्रधानमंत्री कार्यालय ने आरोपों को खारिज किया। कार्यालय की ओर से रिपोर्ट को ऐसे दावों का संग्रह बताया गया जिन्हें पहले भी सामने लाया जा चुका है और जिनका सरकार के अनुसार खंडन हो चुका है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह भी कहा कि मई 2021 में संघर्ष शुरू होने के बाद नेतन्याहू ने कतर की ओर से दी जाने वाली सहायता को रोकने के निर्देश दिए थे। कार्यालय के मुताबिक, बाद में बेनेट-लैपिड सरकार के दौरान यह व्यवस्था फिर शुरू हुई।
इस तरह रिपोर्ट में लगाए गए आरोप और प्रधानमंत्री कार्यालय का पक्ष एक-दूसरे से अलग हैं। मामले में इन दावों की वास्तविकता समझने के लिए संबंधित दस्तावेजों और जांच निष्कर्षों की स्वतंत्र समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।
कतर ने भी आरोपों को बताया गलत
इस विवाद के बीच कतर की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कतर के इंटरनेशनल मीडिया ऑफिस ने उन आरोपों से इनकार किया है जिनमें कहा गया है कि उसने गाजा में हमास को मानवीय सहायता के नाम पर फंडिंग उपलब्ध कराई।
कतर ने इन आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से लगाए जाने वाला बताया और कहा कि उसके खिलाफ लगाए जा रहे दावे घरेलू राजनीतिक विवाद से ध्यान हटाने की कोशिश हैं।
इजरायली विपक्ष ने उठाए सवाल
रिपोर्ट सामने आने के बाद इजरायल में विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और पूर्व IDF चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइजेनकोट समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने रिपोर्ट में सामने आए दावों के आधार पर नेतन्याहू की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का मुख्य सवाल यह है कि यदि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को हमास की वित्तीय स्थिति मजबूत होने की जानकारी थी, तो उस समय इस व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए गए थे।
हालांकि, विपक्षी नेताओं के बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं और उन्हें जांच के स्वतंत्र निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
कतर की मदद और गाजा की आर्थिक व्यवस्था
कतर लंबे समय से गाजा में मानवीय और आर्थिक सहायता से जुड़ी गतिविधियों में शामिल रहा है। 2026 में सामने आई एक अन्य रिपोर्ट में भी बताया गया था कि अक्टूबर 2023 के हमले से पहले इजरायली अधिकारियों और कतर के प्रतिनिधियों के बीच गाजा को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर चर्चा हुई थी।
इसी वजह से कतर की सहायता को लेकर इजरायल में लंबे समय से बहस होती रही है। एक तरफ इसे गाजा की नागरिक आबादी के लिए आर्थिक सहायता के रूप में देखा गया, जबकि दूसरी तरफ इस बात पर सवाल उठते रहे हैं कि क्या इस धन का कोई हिस्सा हमास के सैन्य ढांचे तक पहुंचा।
अब आगे क्या होगा?
येदिओथ अहरोनोथ की नई रिपोर्ट ने इस पुराने और संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर इजरायल की राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल रिपोर्ट में किए गए दावों, नेतन्याहू कार्यालय के जवाब और कतर के इनकार—तीनों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि कतर से गाजा पहुंचने वाली रकम का वास्तविक इस्तेमाल किस तरह हुआ और उस संबंध में इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों के पास उस समय क्या जानकारी थी। इन सवालों के जवाब आधिकारिक दस्तावेजों, जांच और उपलब्ध खुफिया रिकॉर्ड के सार्वजनिक होने के साथ ज्यादा स्पष्ट हो सकते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि रिपोर्ट के सामने आने के बाद इजरायल में कतर की वित्तीय सहायता, हमास के सैन्य ढांचे और नेतन्याहू सरकार की नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय और कतर दोनों ने रिपोर्ट से जुड़े प्रमुख आरोपों पर आपत्ति जताई है।
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