नई दिल्ली: कांग्रेस मेलोनी विवाद अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस के एक कार्यक्रम में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद गहराता जा रहा है। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब विदेश मंत्रालय ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
विदेश मंत्रालय ने सीधे किसी नेता का नाम लिए बिना कहा कि सार्वजनिक मंचों पर किसी भी व्यक्ति या देश के बारे में बात करते समय सम्मान और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। मंत्रालय के इस बयान को कांग्रेस नेताओं की टिप्पणी से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस मेलोनी विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
गुरुवार को आयोजित एक कांग्रेस सम्मेलन में राहुल गांधी केंद्र सरकार की विदेश नीति पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान उन्होंने मंच पर मौजूद वरिष्ठ कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाकर कटाक्ष किया।
मंच पर माहौल हल्का करने के दौरान संदीप दीक्षित ने मजाकिया अंदाज में जॉर्जिया मेलोनी का जिक्र किया। राहुल गांधी ने भी इस पर हंसते हुए प्रतिक्रिया दी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे मजाक के रूप में लिया, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला राजनीतिक बहस में बदल गया।
कांग्रेस मेलोनी विवाद पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
विवाद बढ़ने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि भारत और इटली के बीच मजबूत और मित्रवत संबंध हैं, जिन्हें दोनों देश लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में जुड़े लोगों को अपनी बात रखते समय गरिमा और सम्मान बनाए रखना चाहिए। मंत्रालय की इस टिप्पणी को विवाद पर अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
कांग्रेस मेलोनी विवाद पर बीजेपी का हमला
बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी मित्र देश के शीर्ष नेता को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई नेताओं ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े मामलों में राजनीतिक दलों को अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति से जोड़कर भी निशाना साधा है।
भारत-इटली संबंधों पर क्यों है नजर?
भारत और इटली के संबंध हाल के वर्षों में कई क्षेत्रों में मजबूत हुए हैं। व्यापार, रक्षा, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है।
ऐसे में राजनीतिक मंचों से की गई टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय का बयान यह संकेत देता है कि सरकार द्विपक्षीय संबंधों को लेकर संवेदनशील है और सार्वजनिक विमर्श में संयम बनाए रखने की अपेक्षा करती है।
क्या है आगे की राजनीतिक तस्वीर?
फिलहाल कांग्रेस मेलोनी विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। कांग्रेस की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत सफाई नहीं आई है, जबकि बीजेपी लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है, खासकर तब जब विदेश नीति और कूटनीतिक संबंधों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हों।