मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और अगला तीन दिन प्रदेश के लिए बेहद अहम रहने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने 24 से 26 अगस्त के बीच प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
अभी तक कैसा रहा है मानसून का हाल?
इस साल 1 जून से 23 अगस्त तक मध्य प्रदेश में हुई कुल बारिश दीर्घकालीन औसत से करीब 11% कम दर्ज की गई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में यह कमी लगभग 8% रही, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा करीब 14% तक पहुंच गया है। यानी बारिश का वितरण अब भी असमान बना हुआ है, और आने वाले तीन दिन सूखे इलाकों के लिए राहत तो ला सकते हैं, लेकिन साथ ही जलभराव जैसी नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकते हैं।
24 अगस्त: इन जिलों में अलर्ट
सोमवार यानी 24 अगस्त को डिंडोरी और बालाघाट में अति भारी बारिश की आशंका जताई गई है। इसके अलावा विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, सीधी, रीवा, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, सागर, छतरपुर और पन्ना जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना और श्योपुर सहित आसपास के इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है।
25 अगस्त: बढ़ सकता है बारिश का दायरा
मंगलवार यानी 25 अगस्त को बारिश का असर और फैलने की आशंका है। इस दिन प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी, दोनों संभागों में अति भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। नर्मदापुरम, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, दमोह, सागर, रायसेन, बैतूल, सीधी, शहडोल, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और पांढुर्णा जिलों में इसका सबसे ज्यादा असर दिख सकता है।
26 से 28 अगस्त: कब मिलेगी राहत?
26 अगस्त को भी राहत के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। इस दिन पूर्वी मध्य प्रदेश में अति भारी और पश्चिमी हिस्से में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। 27 अगस्त तक कुछ जिलों में बारिश का असर बना रह सकता है, हालांकि 28 अगस्त से मौसम विभाग ने व्यापक चेतावनी में कमी आने के संकेत दिए हैं।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
23 अगस्त की सुबह तक ही प्रदेश के कई संभागों में बारिश और गरज-चमक दर्ज हो चुकी है, लेकिन असली परीक्षा अब अगले तीन दिनों में होनी है। यह सक्रिय मानसूनी दौर एक तरफ जहां सूखे इलाकों के लिए राहत लेकर आ सकता है, वहीं दूसरी तरफ जलभराव, नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर और आकाशीय बिजली गिरने जैसे खतरे भी साथ लेकर आएगा। ऐसे में 24 से 26 अगस्त के बीच प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए सतर्कता बरतना ही सबसे जरूरी उपाय होगा।
यह भी ध्यान रखें:
- निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले लोग सतर्क रहें।
- गरज-चमक के दौरान खुले मैदान या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
- यात्रा से पहले स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देख लें।
- प्रशासन की ओर से जारी किसी भी चेतावनी या एडवाइजरी को नजरअंदाज न करें।
नोट: यह जानकारी मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान पर आधारित है।
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