चंडीगढ़ को दहलाने की एक बड़ी साजिश आखिरी वक्त में नाकाम हो गई। पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए रविवार देर रात एक ऐसी वारदात को होने से पहले ही रोक दिया, जो शहर में बड़ी तबाही मचा सकती थी। एक लावारिस बैग की तलाशी के दौरान पुलिस को टिफिन बॉक्स में छिपाया गया संदिग्ध IED और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिली। मामले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनके तार खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़े होने का शक जताया जा रहा है।
कैसे खुला पूरा मामला?
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध विस्फोटक सामग्री लेकर शहर में दाखिल हुए हैं। इस इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने रविवार देर रात चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) पर सघन चेकिंग अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान एक लावारिस बैग पर पुलिस की नजर पड़ी, जिसे खोलते ही होश उड़ गए — अंदर टिफिन बॉक्स में एक संदिग्ध IED छिपाकर रखा गया था, साथ ही अन्य विस्फोटक सामग्री और एक हथियार भी बरामद हुआ।
तीन संदिग्ध गिरफ्तार, सभी पंजाब से
पुलिस ने इस साजिश में शामिल तीन युवकों को हिरासत में ले लिया है:
- लवप्रीत सिंह (19) — सरहाली गांव, तरनतारन निवासी
- जशनप्रीत सिंह (21) — देवबाथ गांव निवासी
- प्रभप्रीत सिंह उर्फ प्रभ/प्रभा (19) — तरसिक्का गांव, अमृतसर निवासी
तीनों आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने करीब 5 किलो जिलेटिन स्टिक भी बरामद की है। फिलहाल तीनों से गहन पूछताछ जारी है।
विदेशी हैंडलर से जुड़े थे तार?
जांच में सामने आया है कि तीनों संदिग्ध विदेश में बैठे एक BKI से जुड़े हैंडलर, सतनाम उर्फ सत्ता नौशेरा, के संपर्क में थे। जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपी उसी के इशारे पर काम कर रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपियों को चंडीगढ़ के किसी खास ठिकाने पर विस्फोटक लगाने या किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने का निर्देश दिया गया था।
विस्फोटक कहां से आया, अभी जांच जारी
पुलिस की एक टीम अब इस सवाल का जवाब तलाश रही है कि आरोपियों तक विस्फोटक सामग्री और हथियार आखिर पहुंचे कैसे। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि बरामद IED और बम तैयार कहां किए गए और इन्हें चंडीगढ़ तक किस रास्ते से लाया गया। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि इस नेटवर्क में आरोपियों के अलावा और कौन-कौन शामिल है।
घटना के बाद चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है और शहर में हर संदिग्ध व्यक्ति व वाहन की गहन तलाशी ली जा रही है।
चंडीगढ़ में पहले भी झेल चुका है आतंकी हमले का दंश
यह पहला मौका नहीं जब चंडीगढ़ आतंकी साजिश के निशाने पर आया हो। शहर पहले भी कई बड़े हमले झेल चुका है:
- 29 अगस्त 1991: तत्कालीन SSP सुमेध सिंह सैनी को निशाना बनाकर सेक्टर-17 में कार बम धमाका किया गया था, जिसमें करीब 5 किलो RDX इस्तेमाल हुआ। SSP सैनी बाल-बाल बच गए थे, लेकिन दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए और कई अन्य घायल हुए थे।
- सितंबर 2024: एक सेवानिवृत्त पंजाब पुलिस अधिकारी के घर को निशाना बनाकर ग्रेनेड से हमला किया गया था, जिसमें NIA ने BKI की संलिप्तता उजागर की थी।
- अक्टूबर 1983: एक धार्मिक उत्सव के दौरान हुए बम धमाके में करीब 3 लोगों की मौत हुई थी और लगभग 25 लोग घायल हुए थे।
निष्कर्ष
पुलिस की सतर्कता और समय रहते मिली सूचना ने चंडीगढ़ को एक बड़ी आतंकी वारदात से बचा लिया। हालांकि मामला अभी शुरुआती जांच के दौर में ही है, और सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने में जुटी हैं। सीमा पार से संचालित हो रहे आतंकी नेटवर्क की यह साजिश एक बार फिर पंजाब-चंडीगढ़ बेल्ट में सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी को अहम बना देती है।
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