Operation Sindoor में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय वायुसेना की रणनीति में अहम भूमिका निभाने वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र अब राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की जिम्मेदारी संभालेंगे। आखिर कौन हैं ये Indian Hero, जिनका सैन्य करियर बेहद खास रहा है?
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में नए CEO के तौर पर एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति ने सबका ध्यान खींचा है। इसकी वजह सिर्फ उनकी नई जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उनका लंबा और महत्वपूर्ण सैन्य करियर भी है। जितेंद्र मिश्र वही अधिकारी हैं, जो Operation Sindoor के दौरान भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। इसी कमान ने पाकिस्तान की सीमा से लगे महत्वपूर्ण इलाकों में भारतीय हवाई अभियानों की जिम्मेदारी संभाली थी।
Operation Sindoor में क्या था जितेंद्र मिश्र का रोल?
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने मई 2025 में Operation Sindoor शुरू किया था। 6-7 मई की रात से शुरू हुई इस कार्रवाई में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई होने पर भारतीय सेना ने सैन्य ठिकानों के खिलाफ भी कार्रवाई की।
उस समय एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। उनकी जिम्मेदारी ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि पश्चिमी वायु कमान पाकिस्तान सीमा से जुड़े संवेदनशील हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और अभियानों का संचालन करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अभियान में लक्ष्य चयन, हथियारों के इस्तेमाल और ऑपरेशन को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका रही।
S-400 और ब्रह्मोस ने कैसे बढ़ाई भारत की ताकत?
Operation Sindoor के दौरान भारत ने कई आधुनिक हथियार प्रणालियों और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। इनमें S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, राफेल से दागी जाने वाली SCALP-EG मिसाइल और HAMMER गाइडेड बम सहित कई प्रणालियां शामिल थीं।
S-400 की भूमिका खास तौर पर चर्चा में रही। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के मुताबिक, पाकिस्तानी विमान जब उड़ान भरते थे तो भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम उन पर नजर रखता था। रिपोर्ट में एक ऐसे हमले का भी उल्लेख है जिसमें करीब 314 किलोमीटर दूर लक्ष्य को S-400 से निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
वहीं ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने भारत की लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता को मजबूत किया। इन हथियारों के इस्तेमाल का उद्देश्य दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर प्रभावी हमला करना था।
सीमा पार किए बिना की गई सटीक कार्रवाई
Operation Sindoor की एक बड़ी विशेषता यह रही कि भारतीय सेना ने स्टैंड-ऑफ हथियारों के जरिए कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। यानी भारतीय प्लेटफॉर्म अपनी सीमा के भीतर रहते हुए दूर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम थे।
इस रणनीति में खुफिया जानकारी, लक्ष्य की सटीक पहचान, एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया। इसका मकसद सैन्य लक्ष्य को नुकसान पहुंचाना और नागरिक नुकसान की संभावना को कम रखना था।
जितेंद्र मिश्र का सैन्य करियर भी रहा खास
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र दिसंबर 1986 में फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे। उनके पास 3,000 से अधिक उड़ान घंटों का अनुभव बताया गया है। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
कारगिल युद्ध के दौरान भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने मिराज-2000 से जुड़े अभियानों में काम किया और लेजर गाइडेड बम से संबंधित क्षमताओं के विकास में योगदान दिया था। बाद में वह इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (ऑपरेशंस) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख कब बने थे?
जितेंद्र मिश्र ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में पदभार संभाला था। कुछ ही महीनों बाद पहलगाम आतंकी हमले के बाद Operation Sindoor हुआ।
इस दौरान पाकिस्तान के साथ बढ़े सैन्य तनाव के बीच पश्चिमी मोर्चे पर हवाई अभियानों का संचालन बेहद संवेदनशील जिम्मेदारी थी। ऑपरेशन में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
अब राम मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी
सैन्य सेवा से अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त होने के बाद अब एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की जिम्मेदारी मिली है। यानी जिस अधिकारी ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा देश की सुरक्षा और सैन्य अभियानों में बिताया, वह अब अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कामकाज को संभालेंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर उनकी नई जिम्मेदारी सैन्य कमान से बिल्कुल अलग है, लेकिन उनके प्रशासनिक अनुभव और बड़े स्तर पर संचालन की क्षमता को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Operation Sindoor से राम मंदिर तक का सफर
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का करियर भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट से लेकर पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख और अब राम मंदिर ट्रस्ट के CEO तक पहुंचा है। Operation Sindoor के दौरान उनकी भूमिका ने उन्हें सैन्य क्षेत्र में खास पहचान दी और अब अयोध्या में उनकी नई जिम्मेदारी एक अलग तरह की चुनौती होगी।
इस तरह जितेंद्र मिश्र की कहानी सिर्फ एक सैन्य अधिकारी की नियुक्ति की खबर नहीं है, बल्कि यह उस अधिकारी के सफर को भी दिखाती है जिसने युद्धक अभियानों से लेकर अब देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक के प्रशासन तक की जिम्मेदारी संभाली है।