राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में स्थायी हेलीपैड के निर्माण को रफ्तार देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब जिला, तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों के आसपास स्थायी हेलीपैड बनाने के लिए सरकारी कॉलेजों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों की खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा। शासन का मानना है कि इससे जमीन की कमी की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला
लंबे समय से कई ब्लॉक और तहसील क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड के लिए मानक के अनुरूप जमीन नहीं मिल पा रही थी। इसी दिक्कत को दूर करने के मकसद से शासन ने इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और सरकारी अस्पतालों की रिक्त भूमि का उपयोग करने का निर्णय लिया है। इससे वीवीआईपी दौरों और आपदा राहत कार्यों के दौरान हेलीकॉप्टर उतारने में आसानी होगी।
जिलाधिकारियों को दिए गए निर्देश
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि वे स्थायी हेलीपैड के लिए जल्द से जल्द जमीन उपलब्ध कराएं। जिन इलाकों में भूमि मिलने में परेशानी हो रही है, वहां के जिलाधिकारी संबंधित कॉलेज और अस्पताल प्रबंधन से सीधे संपर्क कर प्रस्ताव तैयार करेंगे और शासन को भेजेंगे। इसके बाद जहां भी जमीन चिन्हित होगी, वहां लोक निर्माण विभाग निर्माण कार्य शुरू करेगा।
कितने हेलीपैड बनेंगे, कितना आएगा खर्च
प्रमुख सचिव के मुताबिक अब तक 118 स्थानों पर स्थायी हेलीपैड के लिए जमीन चिन्हित हो चुकी है, जहां जल्द निर्माण शुरू होगा। इन पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग ने कुल 736 नए हेलीपैड बनाने और 17 पुराने हेलीपैडों की मरम्मत का लक्ष्य रखा है। सरकार नए तहसील व ब्लॉक मुख्यालय भवनों के साथ-साथ नए सर्किट हाउस परिसरों में भी स्थायी हेलीपैड बनाने की व्यवस्था कर रही है।
हर 20 किलोमीटर पर मिलेगा एक हेलीपैड
योजना पूरी होने पर प्रदेश में हर 20 किलोमीटर की दूरी पर एक स्थायी हेलीपैड उपलब्ध होगा। यह सुविधा न सिर्फ वीवीआईपी आवागमन बल्कि आपदा के समय राहत पहुंचाने में भी बेहद कारगर साबित होगी। खास बात यह है कि तय शुल्क देकर आम लोग भी इन हेलीपैड का इस्तेमाल कर सकेंगे।
निर्माण के लिए तय मानक
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के मानकों के अनुसार हर स्थायी हेलीपैड के लिए 100 मीटर लंबाई और 100 मीटर चौड़ाई की जमीन जरूरी है। साथ ही हेलीपैड के पूर्व और पश्चिम दिशा में 250 मीटर तक की दूरी में कोई ऊंचा निर्माण या अवरोध नहीं होना चाहिए, ताकि हेलीकॉप्टर की लैंडिंग और टेक-ऑफ में कोई खतरा न रहे।
इस पहल से उत्तर प्रदेश आपातकालीन सेवाओं और वीवीआईपी यात्राओं के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
हेलीपैड योजना से प्रदेश को होगा बड़ा फायदा
उत्तर प्रदेश सरकार की स्थायी हेलीपैड निर्माण योजना आने वाले समय में प्रदेश के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देगी। अभी तक जमीन की कमी के चलते कई तहसील और ब्लॉक क्षेत्रों में हेलीपैड निर्माण अटका हुआ था, लेकिन कॉलेज और अस्पतालों की खाली भूमि के इस्तेमाल से यह अड़चन अब दूर हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न सिर्फ वीवीआईपी दौरों में समय की बचत होगी, बल्कि बाढ़, भूकंप या अन्य आपदाओं के दौरान राहत सामग्री और मेडिकल टीमों को तेजी से दुर्गम इलाकों तक पहुंचाया जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति में मरीजों को एयरलिफ्ट करने में भी यह सुविधा बेहद कारगर साबित होगी। सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को आपातकालीन सेवाओं के मामले में देश के अन्य राज्यों से आगे ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में स्थायी हेलीपैड नेटवर्क का विस्तार राज्य को आपदा प्रबंधन और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा। आने वाले वर्षों में यह योजना ग्रामीण कनेक्टिविटी सुधारने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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