राजस्थान में नगरीय निकायों की सत्ता किसके हाथ में रहेगी, इसकी तस्वीर अब लगभग साफ हो चुकी है। प्रदेश के कुल 309 निकायों में से 301 में चेयरपर्सन का फैसला हो चुका है, जिनमें से राजस्थान निकाय चुनाव परिणाम में बीजेपी ने 199 बोर्ड अपने नाम किए हैं, जबकि कांग्रेस को महज 94 निकायों में ही संतोष करना पड़ा। दोनों प्रमुख दलों के बीच 105 निकायों का बड़ा फासला बन गया है। अभी 8 निकायों के नतीजे आना बाकी हैं।
दोहरे शतक से एक कदम दूर बीजेपी
पार्टीवार आंकड़ों पर गौर करें तो बीजेपी को 6 नगर निगम, 31 नगर परिषद और 162 नगर पालिकाओं में जीत मिली है। वहीं कांग्रेस के खाते में 1 नगर निगम, 13 नगर परिषद और 80 नगर पालिकाएं आई हैं। बाकी बचे 8 निकायों में अन्य दलों या निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी है।
मेयर पद पर भी बीजेपी हावी
नगर निगमों के मेयर चुनाव के नतीजे भी काफी दिलचस्प रहे। अब तक जिन 7 नगर निगमों में मेयर चुने जा चुके हैं, उनमें से 6 पर बीजेपी और सिर्फ एक पर कांग्रेस का कब्जा हुआ है। अजमेर, उदयपुर, अलवर, पाली, भरतपुर और भीलवाड़ा में बीजेपी को मेयर पद मिला, जबकि बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर चुने गए।
जब पार्षदों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद हार गई कांग्रेस
निकाय चुनाव में वार्ड स्तर पर मिली जीत हमेशा मेयर की कुर्सी तय नहीं करती, और अजमेर इसकी बड़ी मिसाल बना। यहां कांग्रेस के पास 37 और बीजेपी के पास सिर्फ 32 पार्षद थे, फिर भी बीजेपी की अनामिका शर्मा 43 वोटों से मेयर चुनी गईं, जबकि कांग्रेस को 37 वोट मिले। इसी तरह पाली में भी कांग्रेस के पास 29 और बीजेपी के पास 21 पार्षद होने के बावजूद मेयर पद बीजेपी के पास चला गया। अलवर में भी किसी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था, फिर भी बीजेपी ने वहां मेयर की कुर्सी हासिल कर ली। इन नतीजों ने साफ कर दिया कि निर्दलीय पार्षदों के समर्थन ने कई जगह पूरा खेल बदल दिया।
नगर पालिका और नगर परिषद के आंकड़े
252 नगर पालिकाओं में से अभी तक 248 के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जिनमें बीजेपी ने 162 और कांग्रेस ने 80 पर जीत दर्ज की है, जबकि 6 जगह अन्य दलों या निर्दलीयों का बोर्ड बना है। चार नगर पालिकाओं का फैसला अभी बाकी है। वहीं 47 नगर परिषदों में से 46 के परिणाम आ चुके हैं, जिनमें बीजेपी को 31 और कांग्रेस को 13 सीटों पर जीत मिली, जबकि दो जगह अन्य उम्मीदवार जीते हैं।
बारां में खिला आम आदमी पार्टी का पहला बोर्ड
इस चुनाव में दो बड़े दलों के अलावा छोटे दलों ने भी अपनी मौजूदगी दिखाई। बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी की शीतल राठौड़ सभापति चुनी गईं, जो राजस्थान में AAP का पहला नगर परिषद बोर्ड माना जा रहा है। इसके साथ ही कई जगह निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी नतीजों की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।
जयपुर, जोधपुर और कोटा का इंतजार अभी बाकी
प्रदेश के 10 नगर निगमों में से 3 यानी जयपुर, जोधपुर और कोटा के मेयर चुनाव का फैसला अभी नहीं हो सका है। इन तीनों शहरों में दोबारा मतदान वाले वार्डों की वजह से चुनावी कार्यक्रम आगे खिसक गया है और अब यहां 25 सितंबर को मेयर चुने जाएंगे। इसका मतलब है कि मौजूदा आंकड़े पूरी तस्वीर नहीं दिखाते, क्योंकि 3 नगर निगम, 1 नगर परिषद और 4 नगर पालिकाओं समेत कुल 8 निकायों का अंतिम फैसला अभी बाकी है।
राजस्थान निकाय चुनाव परिणाम में बीजेपी ने बड़ी बढ़त बनाते हुए 301 में से 199 निकायों पर कब्जा जमाया है, जबकि कांग्रेस सिर्फ 94 बोर्ड ही जीत सकी। दोनों दलों के बीच 105 निकायों का फासला बन गया है। मेयर चुनाव में भी बीजेपी छह सीटों पर आगे रही।
अजमेर और पाली जैसी जगहों पर कम पार्षद होने के बावजूद बीजेपी ने मेयर पद हासिल किया, जहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम रही। बारां में AAP को पहला नगर परिषद बोर्ड मिला। जयपुर, जोधपुर और कोटा के मेयर चुनाव अभी 25 सितंबर को होने बाकी हैं।
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