आजमगढ़ हत्याकांड ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में घर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के दौरान जो कुछ हुआ, उसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया। इस वारदात में अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है, और अब मुख्य आरोपी की मां ने इस पूरे मामले की परतें खोली हैं।
आजमगढ़ हत्याकांड: घटना की शुरुआत कैसे हुई
पुलिस के मुताबिक, शंभूपुर गांव के अरविंद सिंह के घर पिछले तीन दिनों से महामृत्युंजय का जाप चल रहा था। पत्नी बबीता सिंह ने यह अनुष्ठान तीन पुरोहितों की मौजूदगी में शुरू करवाया था। शाम करीब साढ़े पांच बजे जब अरविंद घर लौटा, तो पूजा करा रहे पंडितों से उसने अचानक आधार कार्ड दिखाने की मांग कर दी, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
मां श्यामबला देवी का बयान: पूरी घटना का खुलासा
आजमगढ़ हत्याकांड में अरविंद की मां श्यामबला देवी ने आजतक से बातचीत में बताया कि बेटे की इस हरकत का पत्नी बबीता ने विरोध किया था। यही विरोध आरोपी को इतना नागवार गुजरा कि उसने रिवाल्वर निकालकर पहले बबीता को गोली मार दी। इसके बाद भागते हुए पुरोहितों में से दो को भी उसने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया, जबकि तीसरा पुरोहित किसी तरह जान बचाकर भाग निकला। मृतकों में पंडित महेंद्र पाठक भी शामिल थे।
पुरानी रंजिश निकली वजह, भाई की हत्या का जिक्र
मां के मुताबिक, अरविंद पिछले कई सालों से मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। 12 अक्टूबर 2018 को उसके बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या हुई थी, जिसके बाद से वह अस्थिर व्यवहार करने लगा था। श्यामबला देवी ने यह भी बताया कि साल 2015 में बबीता ने गांव के दो लोगों के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था, जिसमें दोनों को 20-20 साल की सजा हुई थी। इसी मामले की सुनवाई से ठीक पहले सुनील की हत्या हुई थी, जो अब भी कोर्ट में लंबित है।
जिस रिवाल्वर से हुई वारदात, वह थी भाई की
आजमगढ़ हत्याकांड में इस्तेमाल हुआ हथियार भी परिवार की पुरानी कहानी से जुड़ा है। पुलिस जांच में सामने आया कि जिस रिवाल्वर से अरविंद ने चारों हत्याएं कीं, वह उसके दिवंगत भाई सुनील सिंह की ही लाइसेंसी बंदूक थी, जो बाद में अरविंद के नाम ट्रांसफर हो गई थी।
बच्चों को बनाया बंधक, फिर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
हत्याओं के बाद अरविंद अपने तीन मासूम बच्चों — आठ साल के शौर्य, पांच साल की परी और छह महीने की बेटी — के साथ कमरे में बंद हो गया। उसके पास तीन लाइसेंसी हथियार और दर्जनों कारतूस भी मौजूद थे। पुलिस ने देर रात रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन जैसे ही टीम ने दरवाजा तोड़ा, आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी।
पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ आरोपी, बेटे की भी मौत
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। दुखद यह रहा कि गोलीबारी में घायल हुए उसके आठ वर्षीय बेटे शौर्य को भी इलाज के दौरान बचाया नहीं जा सका। इस तरह आजमगढ़ हत्याकांड में कुल पांच लोगों की जान जा चुकी है — पत्नी बबीता, दो पुरोहित, आरोपी अरविंद और उसका बेटा शौर्य।
फिलहाल गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और पूरे इलाके में सनसनी का माहौल बना हुआ है। पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी है ताकि इस हत्याकांड की हर परत सामने लाई जा सके।
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