मुंबई में विजय माल्या से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर कानूनी दस्तावेज साझा करने को लेकर उन्हें चेतावनी दी। जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच ने माल्या के वकील से कहा कि वह अपने मुवक्किल को भविष्य में इस तरह की गतिविधि से बचने के लिए समझाएं। कोर्ट ने कहा कि अदालत में लंबित मामले को सोशल मीडिया के जरिए आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकता है।
यह मामला उस समय सामने आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अदालत को बताया गया कि एजेंसी द्वारा दाखिल किया गया एक हलफनामा विजय माल्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उस समय पोस्ट कर दिया था, जब अदालत ने अभी उस दस्तावेज पर सुनवाई नहीं की थी। ED ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि मामले से जुड़े दस्तावेजों पर अपना पक्ष अदालत के सामने रखना चाहिए।
ED के हलफनामे को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का मामला
सुनवाई के दौरान ED के वकील अशोक मेहता ने अदालत को बताया कि एजेंसी ने 8 सितंबर को अपना हलफनामा दाखिल किया था और उसी दिन माल्या की कानूनी टीम को उसकी प्रति उपलब्ध करा दी गई थी। मामला अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था।
ED के मुताबिक, दस्तावेज मिलने के कुछ घंटों बाद माल्या ने कथित तौर पर पूरे हलफनामे को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। एजेंसी ने यह भी कहा कि पोस्ट के साथ कुछ ऐसी टिप्पणियां की गईं, जिन पर उसे आपत्ति थी।
इस पर जस्टिस मिलिंद जाधव ने माल्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई से कहा कि वह अपने मुवक्किल को इस तरह की कार्रवाई दोबारा नहीं करने के लिए समझाएं। अदालत ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि जो भी बात रखनी है, उसे अदालत के सामने रखा जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा- सोशल मीडिया पर नहीं, अदालत में रखें अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान जस्टिस जाधव ने स्पष्ट किया कि मामले की कानूनी लड़ाई अदालत के भीतर ही लड़ी जानी चाहिए। कोर्ट ने माल्या के वकील से कहा कि उनके पास सक्षम वकीलों की टीम है और उन्हें मामले में दलीलें अदालत के सामने रखनी चाहिए।
माल्या के वकील अमित देसाई ने अदालत को आश्वस्त किया कि जज की बात उनके मुवक्किल तक पहुंचा दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ED स्वयं सोशल मीडिया पर माल्या से संबंधित जानकारी पोस्ट करती रही है। इसके बावजूद कोर्ट ने लंबित न्यायिक कार्यवाही को सोशल मीडिया पर ले जाने से बचने की बात कही।
किस मामले में चल रही है सुनवाई?
बॉम्बे हाईकोर्ट में विजय माल्या की याचिका वर्ष 2020 से लंबित है। माल्या ने अदालत से उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को बंद करने की मांग की है। उनका तर्क है कि बैंकों के साथ जुड़ी उनकी देनदारियों से संबंधित रकम और संपत्तियों की वसूली हो चुकी है, इसलिए कार्यवाही को आगे जारी रखने का आधार नहीं बचता।
हालांकि, ED ने इस दलील का विरोध किया है। एजेंसी का कहना है कि बैंक की देनदारी की वसूली हो जाना अपने आप में कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आपराधिक मामलों को खत्म करने का आधार नहीं है। ED ने अदालत के सामने यह भी कहा है कि माल्या अभी भी भारत में चल रही कानूनी प्रक्रिया से बाहर हैं।
ED ने बताया- 14,131 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां दी गईं
ED की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि अगस्त 2021 के मूल्यांकन के अनुसार करीब 14,131.6 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम को सौंप दी गई थीं।
एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों की वसूली या हस्तांतरण को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों को खत्म नहीं किया जा सकता। यह मुद्दा अब भी बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने विचाराधीन है।
दूसरी ओर, माल्या की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया है कि बैंकों ने उनकी संपत्तियों से बड़ी रकम की वसूली कर ली है। अगस्त में हुई सुनवाई के दौरान उनके वकील ने दावा किया था कि कंसोर्टियम ने लगभग 15,000 करोड़ रुपये की वसूली की है, जबकि मूल दावा ब्याज सहित करीब 6,203 करोड़ रुपये का था। कोर्ट ने उस समय संबंधित एजेंसियों और SBI से इस दावे की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
मंगलवार की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने SBI के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम को ED के हलफनामे में सामने आई जानकारी पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद विजय माल्या को भी अपनी याचिका में जरूरी संशोधन करने और विस्तृत आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी गई।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित की है। उस दौरान बैंक कंसोर्टियम की ओर से दाखिल जवाब और मामले से जुड़े अन्य दस्तावेजों पर आगे विचार किया जाएगा।
2016 में भारत छोड़ने के बाद से कानूनी कार्रवाई जारी
विजय माल्या मार्च 2016 में भारत से बाहर चले गए थे। नवंबर 2016 में उन्हें अदालत ने घोषित अपराधी (proclaimed offender) घोषित किया था। उनके खिलाफ अब बंद हो चुकी Kingfisher Airlines को दिए गए करीब 9,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग और धन के दुरुपयोग के आरोपों की जांच हुई है। ED ने 2016 में उनकी संपत्तियां कुर्क की थीं।
2019 में एक विशेष अदालत ने SBI और अन्य ऋणदाताओं को कुर्क की गई कुछ चल संपत्तियों का इस्तेमाल बैंक की बकाया रकम की वसूली के लिए करने की अनुमति दी थी। इनमें United Breweries Holdings Ltd से जुड़े शेयर भी शामिल थे। माल्या ने बाद में इस प्रक्रिया को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
फिलहाल अदालत के सामने मुख्य मुद्दों में माल्या की याचिका, बैंकों द्वारा की गई संपत्ति वसूली और आपराधिक कार्यवाही जारी रखने को लेकर ED की आपत्तियां शामिल हैं। सोशल मीडिया पर ED का हलफनामा साझा करने को लेकर मंगलवार को हुई टिप्पणी इसी लंबित कानूनी विवाद की सुनवाई के दौरान सामने आई।