जयपुर: राजस्थान के नगर निकाय चुनाव 2026 के नतीजों के बीच डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगर पालिका से एक ऐसा परिणाम सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। यहां बीजेपी के उम्मीदवार कैलाशचंद को अपने ही वार्ड में महज एक वोट मिला। नतीजा सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में भी तेजी से उभर गया।
कैलाशचंद के लिए चुनावी नतीजा इसलिए भी चौंकाने वाला रहा क्योंकि वह बीजेपी के टिकट पर मैदान में थे, लेकिन मतगणना में उनके पक्ष में सिर्फ एक मत आया। उनका कहना था कि कम से कम वार्ड के किसी एक व्यक्ति ने उन्हें वोट दिया, जिसे वह अपने लिए सकारात्मक बात मानते हैं।
परबतसर में 25 वार्डों पर हुआ था मुकाबला
परबतसर नगर पालिका में कुल 25 वार्ड हैं। यहां पार्षद पदों के लिए 9 और 11 सितंबर को मतदान हुआ था, जबकि 14 सितंबर को मतगणना की गई। राजस्थान के 309 शहरी निकायों में हुए चुनाव में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाएं शामिल थीं।
परबतसर में बीजेपी ने 25 में से 24 वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे। उपलब्ध उम्मीदवार रिकॉर्ड के मुताबिक एक वार्ड में पार्टी ने प्रत्याशी नहीं उतारा था। कांग्रेस ने सभी 25 वार्डों में उम्मीदवार मैदान में उतारे, जबकि आरएलपी के भी उम्मीदवार चुनाव में थे।
RLP के लिए भी नतीजा बना चर्चा का विषय
परबतसर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी RLP के प्रभाव वाले राजनीतिक इलाकों में भी गिना जाता है। ऐसे में निकाय चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर भी नजर थी। हालांकि इस चुनाव में स्थानीय समीकरणों ने तस्वीर को काफी हद तक प्रभावित किया।
नगर निकाय चुनाव में विधानसभा या लोकसभा चुनाव की तरह सिर्फ पार्टी का नाम ही निर्णायक नहीं होता। वार्ड स्तर पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय संबंध, परिवार और सामाजिक समीकरण भी परिणाम को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि किसी पार्टी के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में भी उसका उम्मीदवार बेहद कम वोट हासिल कर सकता है।
राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का प्रदर्शन
राजस्थान के निकाय चुनाव में बीजेपी ने कई जगहों पर मजबूत प्रदर्शन किया है। उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार 1,707 घोषित सीटों में बीजेपी ने 708, कांग्रेस ने 613 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 386 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
हालांकि नगर निकाय चुनावों में पार्टी के राज्यव्यापी प्रदर्शन और किसी एक वार्ड के नतीजे को सीधे एक-दूसरे से जोड़ना सही नहीं होगा। स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार की स्वीकार्यता और वार्ड का समीकरण अक्सर नतीजे बदल देता है।
एक वोट की कहानी ने क्यों खींचा ध्यान?

कैलाशचंद को मिला सिर्फ एक वोट इस चुनाव का सबसे असामान्य नतीजा जरूर बन गया है। आम तौर पर राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को अपने वार्ड में कम से कम दर्जनों या सैकड़ों वोट मिलने की उम्मीद रहती है। ऐसे में बीजेपी जैसे बड़े राजनीतिक दल के उम्मीदवार का एक वोट पर सिमट जाना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया।
यह नतीजा यह भी दिखाता है कि स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के बजाय कई बार उम्मीदवार की व्यक्तिगत लोकप्रियता और जमीनी संगठन ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।
फिलहाल परबतसर के इस नतीजे ने राजस्थान की स्थानीय राजनीति में एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या बड़े राजनीतिक दल का टिकट भी किसी उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ की गारंटी नहीं है? कैलाशचंद का एक वोट वाला परिणाम इसी सवाल की सबसे दिलचस्प मिसाल बन गया है।