‘छात्रों की गूंज’ के सामने बीजेपी का नया डिजिटल दांव
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तकरार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच गई है। बीजेपी की ओर से ‘झूठ की गूंज’ नाम की एक वेबसाइट का जिक्र सामने आने के बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी का कहना है कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए राहुल गांधी द्वारा किए जा रहे दावों को तथ्यों के आधार पर परखा जा रहा है।
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस वेबसाइट का लिंक साझा करते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी जितने दावे कर रहे हैं, उनकी सच्चाई को ‘झूठ की गूंज’ के जरिए सामने लाया जा रहा है। बीजेपी के मुताबिक वेबसाइट का मकसद राहुल गांधी के बयानों को तथ्यों के आधार पर चुनौती देना है।
वेबसाइट में राहुल गांधी के दावों की जांच का दावा
‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट पर राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों के दौरान किए गए दावों की पड़ताल करने का दावा किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, वेबसाइट ने अब तक हुए चार कार्यक्रमों से जुड़े करीब 40 दावों को जांच के दायरे में लेने की बात कही है। हालांकि, वेबसाइट के पीछे किसका संगठनात्मक हाथ है, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
वेबसाइट पर कुछ दावों के जवाब में सरकारी और सार्वजनिक आंकड़ों का हवाला देने की कोशिश की गई है। इनमें रोजगार और महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े राहुल गांधी के बयानों को भी शामिल किया गया है। इन दावों की वेबसाइट अपने तरीके से व्याख्या करती है और उन्हें गलत या भ्रामक बताने का दावा करती है।
कांग्रेस ने बताया बीजेपी का प्रचार अभियान
बीजेपी के इस डिजिटल अभियान पर कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ‘झूठ की गूंज’ को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए इसे सत्ता पक्ष की रणनीति बताया। उन्होंने वेबसाइट को लेकर तंज कसा और इसे ‘मोदी मित्र मंडली’ से जोड़ते हुए बीजेपी पर प्रचार करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी लगातार युवाओं और छात्रों के बीच जाकर रोजगार, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं। ऐसे में उनके बयानों को लेकर अलग वेबसाइट बनाना राजनीतिक जवाब देने की रणनीति का हिस्सा है।
युवाओं को लेकर बढ़ रही सियासी प्रतिस्पर्धा
राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान युवाओं और छात्रों के साथ संवाद पर केंद्रित है। इसी बीच बीजेपी की ओर से भी युवा वर्ग तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिशें तेज हुई हैं। ऐसे में ‘झूठ की गूंज’ को लेकर सामने आया विवाद सिर्फ एक वेबसाइट तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि इसे दोनों प्रमुख दलों के बीच डिजिटल और राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई के तौर पर भी देखा जा रहा है।
फिलहाल बीजेपी वेबसाइट के जरिए राहुल गांधी के दावों को चुनौती देने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रचार का हिस्सा बता रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में ‘छात्रों की गूंज’ और ‘झूठ की गूंज’ दोनों ही नाम राजनीतिक बहस में चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।