Raghav Chadha on Copyright Act: आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार, 18 दिसंबर, 2025 को राज्यसभा में कॉपीराइट अधिनियम, 1957 में संशोधन की मांग उठायी। उन्होंने इस अधिनियम में बदलावों की बात करते हुए कहा की डिजिटल सामग्री रचनाकारों के लिए कानूनी सुरक्षा उपायों की व्यवस्था सुनिश्चित। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लाखों भारतीय अब यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से अपनी आजीविका कमाते हैं, जिसके तहत ये संशोधन आम जनता के हित में।
Copyright Act में संशोधन से सेफ रहेंगे क्रिएटर्स!
राघव चड्ढा ने इस बात पर बल दिया कि स्वचालित कॉपीराइट प्रवर्तन अक्सर कंटेंट क्रिएटर्स के काम को खतरे में डालता है, भले ही सामग्री का उपयोग टिप्पणी, व्यंग्य, शिक्षा या समाचार उद्देश्यों के लिए किया गया हो। उन्होंने डिजिटल उचित उपयोग को परिभाषित करने, प्रवर्तन में आनुपातिकता लाने और सामग्री को हटाने से पहले अनिवार्य उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा।
कानून से तय की जाए आजीविका!
आप सांसद ने कहा कि रचनाकारों के चैनल उनकी प्राथमिक आय और संपत्ति हैं, न कि केवल मनोरंजन की। उन्होंने कहा, “आजीविका का निर्धारण कानून द्वारा होना चाहिए, न कि मनमाने एल्गोरिदम द्वारा।,” उन्होंने साथ ही एल्गोरिदम-आधारित कॉपीराइट स्ट्राइक से उत्पन्न जोखिमों पर भी प्रकाश डाला। राघव चड्ढा ने संसद में कहा की,”हमारा मानना है कि रचनाकारों के अधिकारों में कॉपीराइट धारकों के हितों और नवाचार के बीच संतुलन होना चाहिए। डिजिटल आजीविका की रक्षा रचनात्मकता और सीखने को बढ़ावा देती है।”
आपको बताते चले की 1957 का कॉपीराइट अधिनियम इंटरनेट, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया रचनाकारों से पहले का है। उचित उपयोग संबंधी वर्तमान प्रावधान पुस्तकों, पत्रिकाओं और प्रकाशनों तक ही सीमित हैं, जिससे रचनाकार अनुचित टेकडाउन के प्रति असुरक्षित हो जाते हैं।
Also Read: “अश्लील” और “भद्दा”! Neha Kakkar के गाने Candy Shop पर बवाल…