लक्ष्य चौधरी, गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में सोलर पैनल लगवाने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। जल्द ही गाजियाबाद में पी2पी एनर्जी ट्रेडिंग (पियर-टू-पियर) व्यवस्था लागू होने जा रही है, जिसके तहत सोलर उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त बिजली सीधे अपने पड़ोसी उपभोक्ता को बेच सकेंगे। उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था पहली बार लागू की जा रही है और इस पर तेजी से काम चल रहा है।
अभी तक क्या थी व्यवस्था
अभी तक घर या प्रतिष्ठान की छत पर लगे सोलर पैनल से जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा होने पर उपभोक्ताओं के पास केवल एक ही विकल्प होता था—अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजना और बिजली बिल में उसका समायोजन कराना। अब पी2पी एनर्जी ट्रेडिंग के आने से उपभोक्ताओं के पास एक नया और बेहतर विकल्प जुड़ जाएगा।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था
इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि बिजली बेचने के लिए किसी अलग लाइन या तार बिछाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विक्रेता और खरीदार के बीच पूरा लेनदेन एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होगा, जबकि असल बिजली पीवीवीएनएल के मौजूदा ग्रिड नेटवर्क के माध्यम से ही प्रवाहित होगी। यानी तकनीकी ढांचे में कोई बड़ा बदलाव किए बिना ही उपभोक्ताओं को सीधी खरीद-बिक्री की सुविधा मिल सकेगी।
ग्रिड इस्तेमाल पर लगेगा शुल्क
चूंकि बिजली का प्रवाह मौजूदा ग्रिड के जरिए ही होगा, इसलिए इसके इस्तेमाल के बदले बिजली निगम एक निर्धारित शुल्क वसूलेगा। हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि अतिरिक्त बिजली की बिक्री किस दर पर होगी और ग्रिड शुल्क की राशि कितनी रखी जाएगी। इन दोनों बिंदुओं पर अभी अध्ययन चल रहा है और जल्द ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
जिले में कितने उपभोक्ता जुड़े हैं
गाजियाबाद जिले में वर्तमान में कुल 11,87,567 बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 9,072 उपभोक्ता नेट मीटरिंग व्यवस्था से जुड़े हैं, जबकि लगभग 950 उपभोक्ता नेट बिलिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तरह सोलर से जुड़ी दोनों व्यवस्थाओं में कुल मिलाकर करीब 10,022 उपभोक्ता शामिल हैं, जिन्हें पी2पी एनर्जी ट्रेडिंग लागू होने के बाद सीधा फायदा मिल सकता है।
नेट मीटरिंग में कैसे होता है समायोजन
नेट मीटरिंग व्यवस्था में अतिरिक्त बिजली का लाभ सीधे बिल में समायोजन के तौर पर मिलता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी घर में एक महीने में सोलर पैनल से 300 यूनिट बिजली बनी और खपत सिर्फ 220 यूनिट रही, तो बची हुई 80 यूनिट बिजली ग्रिड में चली जाती है। नियमानुसार इन अतिरिक्त यूनिट्स का समायोजन उपभोक्ता द्वारा ग्रिड से ली गई बिजली के साथ कर दिया जाता है, जिससे बिल में कमी आती है।
नेट बिलिंग में मिलती है तय दर
नेट बिलिंग व्यवस्था का इस्तेमाल मुख्य रूप से व्यावसायिक उपभोक्ता करते हैं। मान लीजिए किसी प्रतिष्ठान ने दिन में 500 यूनिट बिजली सोलर से बनाई, लेकिन उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया। ऐसे में बची हुई अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है और मौजूदा व्यवस्था के तहत उपभोक्ता को इसके लिए 2.90 रुपये प्रति यूनिट की निर्धारित दर से भुगतान किया जाता है।
पी2पी व्यवस्था से मिलेगा नया विकल्प
पी2पी एनर्जी ट्रेडिंग व्यवस्था लागू होने के बाद अतिरिक्त बिजली का लाभ केवल बिल समायोजन तक सीमित नहीं रहेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस बिजली को सीधे किसी दूसरे उपभोक्ता की जरूरत से जोड़ा जा सकेगा, जिससे सोलर उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार यह योजना उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
पी2पी एनर्जी ट्रेडिंग व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश के उन गिने-चुने राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां सोलर उपभोक्ताओं को सीधी बिजली बिक्री की सुविधा मिलेगी। इससे न सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं की आमदनी बढ़ाने में भी यह योजना कारगर साबित होगी।
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