नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने हवाई अड्डे के पास महिपालपुर इलाके में लगातार हो रहे जलभराव और यातायात जाम की समस्या को लेकर सरकारी एजेंसियों पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पाया कि कई बैठकों के बावजूद सुधारात्मक उपायों को लागू करने के लिए अब तक कोई ठोस जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे और बैठकें आयोजित करें और हर अल्पकालिक व दीर्घकालिक उपाय के लिए जिम्मेदार एजेंसी की पहचान कर रिपोर्ट सौंपें। कोर्ट ने साफ कहा कि सभी संबंधित एजेंसियों को 30 अक्टूबर की अगली सुनवाई तक उपायों को लागू करने की विशिष्ट समयसीमा भी बतानी होगी।
भारी कागजी कार्रवाई, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं
सुनवाई के दौरान पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले आदेश के बाद हुई बैठकों से भारी मात्रा में कागजी कार्रवाई तो हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि किस एजेंसी को कौन सा काम सौंपा गया है और उसकी समयसीमा क्या होगी।
क्या है पूरा मामला
यह मामला सामाजिक अधिकार समूह सोशल ज्यूरिस्ट द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास और गुरुग्राम मार्ग पर स्थित महिपालपुर क्षेत्र में भीषण जलभराव की शिकायत की गई थी। इससे पहले कोर्ट ने मुख्य सचिव की देखरेख में गठित विशेष कार्य बल को MCD, DDA, NHAI, दिल्ली जल बोर्ड, DMRC, PWD और एयरपोर्ट संचालक GMR समूह के साथ बैठकें कर तूफानी जल निकासी नाली की व्यवहार्यता जांचने का निर्देश दिया था।
एयरोसिटी विकास से बिगड़ी जल निकासी
हाईकोर्ट में पेश स्थिति रिपोर्ट के अनुसार 3 अगस्त को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें बताया गया कि एयरोसिटी क्षेत्र में विकास कार्यों के चलते मौजूदा जल निकासी नेटवर्क प्रभावित हुआ है, जिससे नजफगढ़ नाले में पानी की निकासी बुरी तरह बाधित हो रही है।
NHAI का रवैया कोर्ट को नागवार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने NHAI के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि NHAI का कोई अधिकारी सुनवाई में मौजूद नहीं था और वर्चुअल रूप से पेश वकील भी ठोस दलीलें देने के बजाय केवल स्थगन मांगते रहे, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।
अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा
एनएचएआई और डायल (DIAL) ने संयुक्त रूप से कुछ उपाय सुझाए हैं। अल्पकालिक उपायों में समालखा और महिपालपुर जंक्शन पर पंपिंग स्टेशन लगाना शामिल है, जबकि दीर्घकालिक उपायों में महिपालपुर नाले के अवरोध बिंदुओं को हटाना, द्वारका एक्सप्रेसवे की जल निकासी प्रणाली को दोबारा डिजाइन करना और नजफगढ़ व समालखा नालों की नियमित सफाई शामिल है।
अगली सुनवाई तक क्या करना होगा
कोर्ट ने मुख्य सचिव को 15 अक्टूबर तक दो और बैठकें बुलाने और जिम्मेदार एजेंसियों की पहचान कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही 30 अक्टूबर तक सभी एजेंसियों को अपनी कार्ययोजना और समयसीमा सहित स्थिति रिपोर्ट देनी होगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो वह सख्त आदेश पारित करने के लिए बाध्य होगी। अगली सुनवाई में सभी एजेंसियों के जिम्मेदार अधिकारियों और सक्षम प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया गया है।
कोर्ट की टिप्पणी: तस्वीरें देखकर भी नहीं जागीं एजेंसियां
दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि महिपालपुर में जलभराव की तस्वीरें देखकर संबंधित एजेंसियों को गंभीर प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि कोई भी विशिष्ट एजेंसी समस्या को हल करने की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है, जबकि बैठकों के कार्यवृत्त में कार्य तो सौंपे गए, पर जमीनी स्तर पर अमल नहीं दिखा। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि प्रमुख अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रस्ताव एनएचएआई की ओर से आए, जो इस क्षेत्र के लिए मुख्य जिम्मेदार एजेंसी प्रतीत होती है।
ये भी पढ़ें: