मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) में तैनात सहायक अभियंता (AE) राजेंद्र बहुगुणा पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि निजी स्वार्थ और अवैध कमाई के लालच में AE राजेंद्र बहुगुणा ने प्राधिकरण को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया है। यदि मामले की निष्पक्ष और गहन जाँच होती है, तो कई बड़े और चौंकाने वाले राज सामने आ सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, कम्पॉडिंग फाइलों के नाम पर मोटी रकम की अवैध वसूली की जाती रही है। आरोप है कि जिन मामलों में नियमानुसार भारी सरकारी शुल्क लिया जाना चाहिए था, वहां जानबूझकर सरकारी फीस कम करके दर्शाई गई, जबकि शेष बची हुई मोटी रकम कथित रूप से निजी जेब में डाल ली गई।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से किया गया, जिससे एक ओर जहां आम नागरिकों से अवैध वसूली होती रही, वहीं दूसरी ओर MDDA को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। नियमों को ताक पर रखकर फाइलों का निस्तारण किया गया और उच्च अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप भी लग रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि यदि बीते कुछ वर्षों की कम्पॉडिंग फाइलों का ऑडिट और तकनीकी परीक्षण कराया जाए, तो राजेंद्र बहुगुणा की कार्यशैली पर कई सवालिया निशान खड़े हो सकते हैं। सवाल यह भी उठता है कि क्या यह सब बिना किसी संरक्षण के संभव था, या फिर इस खेल में और भी चेहरे शामिल हैं?
अब देखना यह होगा कि MDDA प्रबंधन और शासन इस गंभीर मामले में कब तक चुप्पी साधे रहता है, या फिर निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, AE राजेंद्र बहुगुणा पर लगे आरोपों ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
यदि इस मामले में संबंधित अधिकारी का कोई पक्ष या स्पष्टीकरण सामने आता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।