देहरादून के सेक्टर–4 में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के अंतर्गत धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां MDDA के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी प्राधिकरण को पारदर्शिता और विकास की राह पर ले जाने की बात कर रहे हैं और आगे विकास कर रहे है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं के विभाग के सहायक अभियंता (AE) राजेंद्र बहुगुणा पर बेहद गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
अवैध निर्माण का खेल बदस्तूर जारी
सूत्रों के अनुसार, AE राजेंद्र बहुगुणा के प्रभार वाले क्षेत्र में बिना नक्शा पास, बिना मानकों के निर्माण खुलेआम चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्राधिकरण की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन न तो कोई सख्त कार्रवाई दिख रही है और न ही निर्माण पर प्रभावी रोक।
कम्पाउडिंग के नाम पर अवैध वसूली?
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि कम्पाउडिंग के नाम पर अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा है। नियमों के मुताबिक जहां निर्माण सील होना चाहिए, वहां ‘सेटिंग’ के दम पर फाइलें दबाई जा रही हैं और अवैध निर्माण को वैध बनाने की कोशिशें की जा रही हैं।
प्राधिकरण को करोड़ों के राजस्व का नुकसान
सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन कथित गड़बड़ियों के चलते MDDA को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगा है। नियमों के तहत वसूले जाने वाले शुल्क, पेनाल्टी और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जानबूझकर कमजोर की जा रही है, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान और निजी जेबें भरने का आरोप लगाया जा रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या AE को किसी का संरक्षण प्राप्त है? यदि नहीं, तो फिर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही?
जांच की मांग तेज
मामले ने तूल पकड़ लिया है। मांग उठ रही है कि:
सेक्टर– 4 के सभी निर्माणों की स्वतंत्र जांच हो
AE राजेंद्र बहुगुणा की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
अवैध निर्माणों पर तत्काल सीलिंग/ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो
कम्पाउडिंग और वसूली से जुड़े सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं
अब सवाल साफ है—क्या MDDA नेतृत्व इस कथित भ्रष्टाचार पर कठोर कदम उठाएगा, या फिर सेक्टर–4 यूं ही अवैध निर्माण और अवैध वसूली का गढ़ बना रहेगा?