विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन दौरे पर कहा- जरूरत पड़ी तो निभाएंगे शांति-प्रयासों में भूमिका, ब्लैक सी में नाविकों की सुरक्षा पर भी जताई चिंता
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने में हरसंभव मदद देने को तैयार है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर स्थिति की मांग हुई तो नई दिल्ली इस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने से भी पीछे नहीं हटेगी। गुरुवार को कीव में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जयशंकर ने यह टिप्पणी की, जब वे यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ मौजूद थे।
गौर करने वाली बात यह है कि जयशंकर की यह पेशकश ऐसे वक्त आई है जब कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने युद्ध रोकने और शांति बहाली की उम्मीद जताई थी।
काला सागर में सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
अपने बयान में जयशंकर ने ब्लैक सी यानी काला सागर क्षेत्र में भारतीय नाविकों समेत सभी नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने साफ किया कि युद्ध का हल बातचीत और कूटनीतिक रास्ते से ही निकाला जाना चाहिए। गौरतलब है कि काला सागर दुनिया के अहम व्यापारिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है, क्योंकि रूस और यूक्रेन से गेहूं, मक्का और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा इसी रूट से वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है।
सिबिहा के साथ हुई द्विपक्षीय बातचीत
अपने यूक्रेन दौरे के दौरान जयशंकर ने विदेश मंत्री सिबिहा के अलावा पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच कमर्शियल शिपिंग पर हो रहे हमलों को लेकर भी चर्चा हुई।
यूक्रेन ने कहा- मुश्किल वक्त में यह यात्रा अहम
यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने जयशंकर के इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि रूस लगातार यूक्रेनी शहरों, बंदरगाहों और नागरिक जहाजों को निशाना बना रहा है, ऐसे नाजुक दौर में भारतीय विदेश मंत्री का यूक्रेन पहुंचना खास मायने रखता है। दोनों नेताओं ने काला सागर में जहाजों की आवाजाही सामान्य बनाने और इससे जुड़ी वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी विस्तार से बात की।
सिबिहा ने पीएम मोदी के लगातार कूटनीति और संवाद के जरिए युद्ध खत्म करने के रुख की सराहना भी की। दोनों देश जल्द अगली अंतर-सरकारी आयोग बैठक आयोजित करने पर सहमत हुए, साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
2022 से जारी है रूस-यूक्रेन संघर्ष
रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था, जिसमें रूस ने यूक्रेन के करीब 20 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा जमा लिया। इस लड़ाई में हजारों सैनिकों और आम नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग बेघर होकर दूसरे देशों में शरण लेने को मजबूर हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार जून 2023 तक करीब 80 लाख यूक्रेनी नागरिक देश छोड़ चुके थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इस युद्ध को खत्म कराने के लिए दोनों पक्षों से बातचीत कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने अलास्का में पुतिन से मुलाकात की थी, जो करीब आठ दशकों में किसी रूसी राष्ट्राध्यक्ष की पहली अलास्का यात्रा मानी जा रही है।