पाकिस्तान ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर दिए गए अपने शुरुआती सख्त संकेत से अब दूरी बना ली है। एक दिन पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक फैलता है तो मक्का रक्षा समझौता सक्रिय हो सकता है। इसके बाद सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, अब पाकिस्तान सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल हूतियों के खिलाफ किसी सैन्य जवाब पर चर्चा नहीं हो रही है।
एक दिन में बदल गया पाकिस्तान का रुख
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 9 सितंबर को कहा था कि सऊदी अरब पर किसी तरह की बिना उकसावे वाली आक्रामकता या यमन के संघर्ष के सऊदी क्षेत्र में फैलने की स्थिति में मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट लागू हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि समझौते की शर्तों का पाकिस्तान पालन करेगा।
इस बयान के बाद ऐसी चर्चा शुरू हो गई थी कि पाकिस्तान सऊदी अरब की मदद के लिए हूती ठिकानों पर कार्रवाई कर सकता है। कुछ रिपोर्टों में तो यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ संभावित हवाई हमलों पर विचार किए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, यह आधिकारिक तौर पर घोषित सैन्य योजना नहीं थी।
अब कहा- सैन्य कार्रवाई पर कोई चर्चा नहीं
10 सितंबर को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मक्का समझौते के तहत फिलहाल किसी सैन्य प्रतिक्रिया पर चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ हुए समझौते को लेकर प्रतिबद्ध है, लेकिन तत्काल किसी सैन्य कदम पर विचार नहीं किया जा रहा।
इस बयान के बाद पाकिस्तान के पहले के आक्रामक रुख में नरमी साफ दिखाई दे रही है। यानी एक तरफ रक्षा मंत्री ने समझौते के सक्रिय होने की संभावना बताई, वहीं अगले ही दिन विदेश मंत्रालय ने किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई की योजना से इनकार कर दिया।
क्या है मक्का रक्षा समझौता?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने अगस्त 2026 में मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते का मूल उद्देश्य तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत किसी सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी सदस्यों पर हमला माना जा सकता है।
हालांकि पाकिस्तान ने अब यह स्पष्ट किया है कि समझौता अपने आप किसी दूसरे देश के खिलाफ आक्रामक सैन्य अभियान चलाने का लाइसेंस नहीं देता। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी पहले कह चुके थे कि यह समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है।
सऊदी अरब पर हूतियों के हमले से बढ़ा तनाव
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक हमलों में नागरिक और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाएं भी निशाने पर आईं तथा 70 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद क्षेत्रीय तनाव तेजी से बढ़ा है।
फिलहाल पाकिस्तान का बदला हुआ रुख यह संकेत देता है कि इस्लामाबाद सीधे सैन्य टकराव में उतरने के बजाय रक्षा समझौते और कूटनीतिक रास्ते पर जोर देना चाहता है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि सऊदी अरब पर हूती हमले आगे बढ़ते हैं या क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए बातचीत का रास्ता मजबूत होता है।