उत्तराखंड के नैनीताल जिले में लंबे समय से चल रही नैनीताल प्राइवेट स्कूल फीस मनमानी की शिकायतों पर आखिरकार जिला प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। जांच में सामने आया कि जिले के दर्जनों निजी स्कूल नियमों के विपरीत जाकर अभिभावकों से अतिरिक्त फीस वसूल रहे थे। इसके बाद प्रशासन के दबाव में 46 स्कूलों ने अब तक 39 लाख 5 हजार 405 रुपये अभिभावकों को वापस लौटा दिए हैं।
कैसे शुरू हुई जांच?
नैनीताल में ट्यूशन फीस बढ़ोतरी, परीक्षा शुल्क और टीसी शुल्क को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिले के सभी निजी विद्यालयों की फीस व्यवस्था की जांच के आदेश दिए। प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की, जिसमें कई स्कूलों में नियमों से हटकर शुल्क वसूली की पुष्टि हुई।
87 स्कूलों में मिली गड़बड़ी, 46 ने लौटाई रकम
जांच के दायरे में आए 87 निजी स्कूलों में नियमविरुद्ध फीस वसूली के मामले सामने आए। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित स्कूलों को अतिरिक्त रकम वापस करने या आगामी फीस में समायोजित करने के निर्देश दिए। अब तक 46 स्कूल इस पर अमल कर चुके हैं और अभिभावकों को कुल 39 लाख रुपये से अधिक की राशि वापस मिल चुकी है।
ट्यूशन से लेकर टीसी शुल्क तक में कटौती
नैनीताल प्राइवेट स्कूल फीस मनमानी मामले में सिर्फ रकम वापसी तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही। 8 स्कूलों ने बढ़ाई गई ट्यूशन फीस घटाई, वहीं 39 स्कूलों ने परीक्षा शुल्क कम किया। इसके अलावा 15 स्कूलों ने पंजीकरण शुल्क घटाया या पूरी तरह खत्म कर दिया। सबसे चौंकाने वाला मामला ट्रांसफर सर्टिफिकेट यानी टीसी शुल्क का रहा, जहां तय एक रुपये के बजाय कुछ स्कूल 100 से 1000 रुपये तक वसूल रहे थे। अब टीसी शुल्क सख्ती से एक रुपये ही तय किया गया है।
फीस बढ़ोतरी पर भी लगी सीमा
प्रशासन ने साफ किया है कि अब निजी विद्यालय तीन साल में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे और इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ यानी PTA की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसके साथ ही उच्च कक्षाओं में परीक्षा शुल्क की सीमा भी 600 रुपये तय कर दी गई है, ताकि मनमाने ढंग से शुल्क वसूली पर रोक लगे।
नियम तोड़ने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई
जो स्कूल नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर RTE एक्ट के तहत 1 लाख रुपये तक और CBSE उपविधियों के तहत 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। जिन स्कूलों ने अब तक रकम वापस नहीं की है, प्रशासन ने उन्हें अंतिम चेतावनी दी है और जरूरत पड़ने पर उनकी मान्यता समाप्त करने की संस्तुति भेजी जा सकती है।
नैनीताल प्राइवेट स्कूल फीस मनमानी के खिलाफ प्रशासन की यह कार्रवाई अभिभावकों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है और आने वाले समय में इसका असर पूरे उत्तराखंड में देखा जा सकता है।