नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी है। किसी ने अपना घर खोया, किसी ने रोजी-रोटी और कई परिवारों से उनके अपने हमेशा के लिए बिछड़ गए। बाढ़ के बाद अब सबसे दर्दनाक काम लापता लोगों की तलाश और बरामद शवों की पहचान करना बना हुआ है। इसी बीच अमृत दियाली की कहानी सामने आई है, जो अपने लापता भाई की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।
26 अगस्त को नेपाल के भोतेकोशी नदी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। पानी के तेज बहाव में घर, सड़कें और पुल तक बह गए। इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
बहाव में मिला इंसानी हाथ, भाई की याद आई
अमृत दियाली की मुश्किल उस वक्त और बढ़ गई, जब उन्हें बाढ़ के पानी के साथ बहकर आया एक इंसानी हाथ दिखाई दिया। हाथ की हालत बेहद खराब थी और उस पर मिट्टी जमा थी। लेकिन अमृत को लगा कि यह हाथ उनके छोटे भाई राज कुमार के हाथ से काफी मिलता-जुलता है।
राज कुमार दियाली अपनी पत्नी श्रिति और चार साल के बेटे सिराज के साथ बाढ़ के बाद से लापता हैं। परिवार के लिए यह हाथ एक साथ उम्मीद और डर दोनों लेकर आया। अगर यह राज कुमार का हाथ है तो शायद परिवार को कम से कम उनके बारे में सच्चाई पता चल सकेगी।
DNA टेस्ट से खुलेगा राज
सिर्फ हाथ की शक्ल देखकर पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसलिए अब परिवार को DNA टेस्ट का इंतजार है। नेपाल में बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में ऐसे शव और मानव अवशेष बरामद हुए हैं, जिनकी पहचान सिर्फ चेहरे या कपड़ों से करना मुश्किल हो रहा है।
ऐसे मामलों में DNA प्रोफाइलिंग परिवारों के लिए आखिरी उम्मीद बन गई है। अमृत के परिवार को भी अब इसी जांच से पता चलेगा कि बरामद मानव अंग उनके भाई राज कुमार का है या नहीं।
हजारों परिवार अपनों की तलाश में
नेपाल में आई इस आपदा का असर सिर्फ उन लोगों तक सीमित नहीं है, जिन्होंने अपनी जान गंवाई। बड़ी संख्या में परिवार आज भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। कई शव इतने क्षत-विक्षत हो चुके हैं कि उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल है।
भारतीय और नेपाली एजेंसियों के साथ विशेषज्ञ टीमें भी पहचान की प्रक्रिया में जुटी हैं। DNA सैंपल के जरिए शवों और लापता लोगों के परिजनों का मिलान करने की कोशिश की जा रही है। नेपाल में शवों की पहचान के लिए फोरेंसिक प्रक्रिया को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
बाढ़ ने उजाड़ दीं कई जिंदगियां
26 अगस्त की इस विनाशकारी घटना ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने के बाद अचानक आई बाढ़ ने नदी के आसपास बसे इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। हजारों घर प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए।
राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन कई इलाकों में मलबे और खराब संपर्क व्यवस्था के कारण अभियान मुश्किल बना हुआ है। दूसरी ओर, परिवारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। वे हर बरामद शव और हर छोटी सूचना में अपने किसी करीबी की खबर तलाश रहे हैं।
अमृत दियाली के लिए भी इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है। उनके सामने एक इंसानी हाथ है, जो उनके भाई का हो सकता है। लेकिन जब तक DNA रिपोर्ट नहीं आती, तब तक परिवार के पास सिर्फ अंदाजा और उम्मीद है। यही स्थिति नेपाल के उन हजारों परिवारों की है, जो इस विनाशकारी बाढ़ के बाद अपने अपनों की पहचान और अंतिम खबर का इंतजार कर रहे हैं।
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