दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में हुए Building Collapse ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। रविवार दोपहर एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई, जिसमें अब तक छह लोगों की जान जा चुकी है। यह इमारत पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में इस्तेमाल हो रही थी और छुट्टी का दिन होने के कारण उस वक्त अधिकतर छात्र कमरों में ही मौजूद थे, जिसकी वजह से जनहानि ज्यादा हुई। AIIMS में अब तक चार शवों की शिनाख्त हो चुकी है, जबकि दो अन्य की पहचान की प्रक्रिया अभी बाकी है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
Delhi Building Collapse: रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी
Building Collapse के बाद सोमवार तड़के से ही NDRF सहित कई एजेंसियां मलबे में दबे लोगों को निकालने के काम में जुटी हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद सुबह मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। प्रशासन के अनुसार अब तक करीब 80 प्रतिशत मलबा हटाया जा चुका है, जिसमें से 12 लोगों को निकाला गया, जिनमें 6 की मौत हो चुकी है और 6 घायल अवस्था में मिले हैं
Delhi Building Collapse पर LG ने बुलाई हाई लेवल बैठक
घटना को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इस Building Collapse को लेकर एक हाई लेवल बैठक बुलाई है। इस बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के भी शामिल होने की जानकारी है। DDA, MCD और दिल्ली पुलिस समेत सभी संबंधित विभागों को इस बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक शाम करीब 5 बजे आयोजित हो सकती है, जिसमें हादसे से जुड़े कई अहम फैसले लिए जाने की संभावना है।
प्रशासन का रुख: जवाबदेही तय करने की तैयारी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिशा-निर्देश पर काम किया जा रहा है और घटनास्थल के आसपास की जर्जर इमारतों को भी खाली करा लिया गया है। बगल की एक और असुरक्षित इमारत को गिराने की योजना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में शहर की सभी पुरानी और जर्जर इमारतों का ऑडिट कराया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
आगे क्या होगा
फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और रेस्क्यू टीमें मलबे में फंसे किसी भी व्यक्ति की तलाश जारी रखे हुए हैं। इस मामले में LG की बैठक के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा और स्पष्ट हो सकती है। स्थानीय निवासियों में डर और गुस्से का माहौल है, और वे प्रशासन से जल्द व ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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