लखनऊ में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजों ने कानून और सुरक्षा एजेंसियों का डर दिखाकर एक सेवानिवृत्त परिवहन अधिकारी को कई दिनों तक मानसिक दबाव में रखा। आरोपियों ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके मुंबई में सिम और बैंक खाता खोला गया है। इसी खाते में पाकिस्तान से 2.50 करोड़ रुपये आने और कथित टेरर फंडिंग से जुड़े होने की बात कहकर उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी गई।
मामला लखनऊ के राजाजीपुरम इलाके में रहने वाले परिवहन विभाग के सेवानिवृत्त क्षेत्रीय प्रबंधक से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, 1 सितंबर को उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को सुरेश म्हात्रे बताया और कहा कि उनके आधार का इस्तेमाल मुंबई में एक मोबाइल कनेक्शन लेने के लिए किया गया है।
पाकिस्तान से पैसे आने का बनाया डर
बातचीत के दौरान साइबर ठगों ने दावा किया कि इसी सिम के जरिए मुंबई में बैंक खाता खोला गया और उस खाते में पाकिस्तान से करीब 2.50 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए हैं। आरोपियों ने यह भी कहा कि खाते से जुड़े व्यक्ति को 25 लाख रुपये कमीशन मिला है।
इसके बाद मामले को और गंभीर बनाने के लिए जालसाजों ने इसे कथित टेरर फंडिंग और पुलवामा आतंकी मामले से जोड़ दिया। पीड़ित को बताया गया कि जांच में उनका नाम सामने आया है और यदि उन्होंने अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
पुलिस और CBI अधिकारी बनकर वीडियो कॉल
ठगी की साजिश यहीं खत्म नहीं हुई। आरोपियों ने वीडियो कॉल के दौरान पुलिस की वर्दी पहने व्यक्ति को दिखाया और खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताया। इसके बाद कथित तौर पर डीजीपी और सीबीआई अधिकारी से बातचीत कराने का दावा किया गया।
पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए कहा गया। आरोपियों ने उन्हें किसी रिश्तेदार या परिचित से इस बारे में बात करने पर कार्रवाई की धमकी भी दी। डर का माहौल बनाने के लिए कथित गिरफ्तारी वारंट के दस्तावेज भी भेजे गए।
FD और बचत की रकम कराई ट्रांसफर
लगातार दबाव के बीच जालसाजों ने जांच में सहयोग करने के नाम पर पीड़ित को अपनी जमा पूंजी निकालने के लिए कहा। उनके दबाव में रिटायर्ड अधिकारी ने करीब 9 लाख रुपये की एफडी तुड़वाई और बताए गए बैंक खाते में रकम भेज दी।
इसके बाद उनसे पोस्ट ऑफिस की करीब 5 लाख रुपये की एमआईएस भी तुड़वाई गई। अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराने के बाद भी आरोपी उनसे और पैसे भेजने का दबाव बनाते रहे। इस तरह शिकायत के मुताबिक करीब 19 लाख रुपये की ठगी हो गई।
फोन बंद हुआ तो खुला साइबर फ्रॉड का राज
रकम ट्रांसफर कराने के बाद जालसाजों ने कहा कि वे जांच से संबंधित रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं और कुछ घंटे बाद दोबारा संपर्क करेंगे। लेकिन इसके बाद आरोपियों के फोन आने बंद हो गए। संपर्क करने की कोशिश करने पर नंबर भी बंद मिला।
तब पीड़ित को समझ आया कि वह किसी सरकारी जांच का हिस्सा नहीं, बल्कि साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की और बाद में लखनऊ साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस अब इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और वीडियो कॉल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
ऐसे मामलों में क्या सावधानी रखें?
पुलिस या कोई जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को कई दिनों तक निगरानी में रखकर बैंक खाते की रकम ट्रांसफर करने का निर्देश नहीं देती। अगर कोई व्यक्ति पुलिस, CBI, ED या किसी अन्य एजेंसी का अधिकारी बनकर डराए और पैसे भेजने को कहे, तो तुरंत बातचीत रोककर आधिकारिक माध्यम से उसकी पुष्टि करनी चाहिए। साइबर ठगी होने पर जल्द से जल्द 1930 पर शिकायत करना भी महत्वपूर्ण है।
ये भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जल्द दाखिल होगी चार्जशीट