कुरुक्षेत्र धान खरीद विवाद ने एक बार फिर जिले का माहौल गर्मा दिया है। शाहाबाद इलाके में किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को जाम कर प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया, जिसके बाद पुलिस-प्रशासन ने भी सख्त रुख अपना लिया। अब दोबारा महापंचायत बुलाए जाने के ऐलान के बाद पुलिस ने कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया है।
कुरुक्षेत्र धान खरीद विवाद की शुरुआत कैसे हुई
मंगलवार को शाहाबाद में भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) की अगुवाई में शहीद ऊधम सिंह स्मारक पर एक बड़ी किसान महापंचायत हुई। किसानों की मुख्य मांग थी कि क्षेत्र में धान की खरीद तुरंत शुरू करवाई जाए। महापंचायत के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने पुलिस को चकमा देते हुए अचानक NH-44 पर जाम लगा दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
पुलिस की सख्ती, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल
जाम को हटवाने के लिए पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। मौके पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। इस झड़प में पुलिसकर्मियों के साथ-साथ कुछ किसानों को भी मामूली चोटें आईं। हालात संभालने के लिए पुलिस ने मौके से कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया।
दोबारा महापंचायत का ऐलान, बढ़ी पुलिस सक्रियता
जाम खाली कराए जाने के बाद किसानों ने बराड़ा रोड पर ही अपना धरना जारी रखा और देर रात बुधवार को फिर से महापंचायत बुलाने की घोषणा कर दी। यह ऐलान होते ही पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया और कुरुक्षेत्र धान खरीद विवाद से जुड़े किसान नेताओं के घरों पर दबिश देना शुरू कर दिया।
रातों-रात कई किसान नेता हिरासत में
पुलिस ने शहीद भगत सिंह किसान यूनियन के पदाधिकारी संजीव आलमपुर और गांव किरमिच निवासी संजू नंबरदार को देर रात करीब एक बजे उनके घर से हिरासत में लिया। इसके कुछ घंटे बाद, तड़के तीन बजे के आसपास गांव लोहार माजरा से किसान नेता प्रिंस वड़ैच को भी डिटेन कर लिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई को भांपते हुए कई अन्य किसान नेता पहले ही अपने घरों से दूर चले गए, जिससे पुलिस को उन तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।
भाकियू प्रमुख गुरनाम चढ़ूनी की अगुवाई में आंदोलन जारी
कुरुक्षेत्र धान खरीद विवाद के केंद्र में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी हैं। उन्हीं के धरना स्थल से महापंचायत बुलाए जाने का संदेश जारी हुआ था, जिसके बाद पूरे जिले में पुलिस सतर्क हो गई। प्रशासन को आशंका है कि दोबारा बुलाई गई महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान जुट सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
शाहाबाद में जुटने लगे किसान, पुलिस की पैनी नजर
मंगलवार सुबह से ही बड़ी संख्या में किसान शाहाबाद धरना स्थल की ओर पहुंचने लगे थे। पुलिस किसानों की हर गतिविधि पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि आशंका है कि किसान आज कोई और बड़ा फैसला ले सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां पहले से मजबूत कर ली हैं।
आगे क्या हो सकता है
कुरुक्षेत्र धान खरीद विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा। किसान संगठन धान खरीद जल्द शुरू कराने की मांग पर अड़े हैं, वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बरत रहा है। आने वाले दिनों में महापंचायत को लेकर स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिस पर पूरे इलाके की नजर टिकी हुई है।
कुरुक्षेत्र धान खरीद विवाद यह दिखाता है कि किसानों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। हर साल की यही कहानी — फसल तैयार, मगर खरीद अटकी — किसानों को सड़क पर उतरने पर मजबूर कर देती है। पुलिस की सख्ती अपनी जगह जरूरी हो सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि समय पर खरीद शुरू क्यों नहीं होती? जब तक यह बुनियादी दिक्कत हल नहीं होगी, महापंचायतें और जाम बार-बार लौटते रहेंगे।
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