देहरादून में विधायक निधि के खर्च को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि विधायक निधि को देखने के नजरिए में बदलाव की आवश्यकता है, क्योंकि आंकड़े देखने भर से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
पांच साल में 23 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का दावा
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने कार्यकाल का पूरा आंकड़ा सार्वजनिक करते हुए दावा किया कि बीते पांच वर्षों में कुल 25 करोड़ रुपये की विधायक निधि में से 23 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही खर्च की जा चुकी है। उनके अनुसार वर्तमान में केवल डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास की राशि ही शेष बची है। यह आंकड़ा पेश कर उन्होंने विधायक निधि के दुरुपयोग या रोके जाने संबंधी आरोपों को खारिज करने का प्रयास किया।
स्वीकृति के बाद भी प्रक्रिया में लगता है समय
मंत्री उनियाल ने बताया कि कई बार विधायक स्तर से निधि स्वीकृत हो जाने के बावजूद उसका असर तुरंत रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देता। इसकी वजह यह है कि निधि स्वीकृति के बाद एस्टीमेट तैयार करने, धनराशि आवंटित करने और फिर कार्य को धरातल पर उतारने जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। यह पूरी प्रक्रिया सीडीओ कार्यालय और ब्लॉक स्तर पर संपन्न होती है, जिसमें स्वाभाविक रूप से कुछ समय लगता है। यही कारण है कि प्रक्रियागत विलंब के चलते रिकॉर्ड में निधि खर्च न हुई दिखाई दे सकती है, भले ही जमीनी स्तर पर कार्य प्रगति पर हो।
बाइट – सुबोध उनियाल, कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड
“विधायक निधि को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उन्हें देखने का नजरिया बदलने की जरूरत है। पिछले पांच साल में मुझे जो 25 करोड़ रुपये की विधायक निधि मिली है, उसमें से 23 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की जा चुकी है, जबकि करीब डेढ़ करोड़ रुपये ही शेष बचे हैं। कई बार ऐसा होता है कि विधायक स्तर से निधि स्वीकृत होने के बाद भी एस्टीमेट तैयार करने, धनराशि आवंटित करने और कार्य को धरातल पर उतारने में समय लगता है। यह पूरी प्रक्रिया सीडीओ कार्यालय और ब्लॉक स्तर पर होती है, जिसके चलते रिकॉर्ड में निधि खर्च नहीं हुई दिखाई दे सकती है, जबकि हकीकत में काम प्रगति पर होता है। चुनाव के समय जानबूझकर निधि रोककर रखने वाले विधायक बहुत कम हैं, अधिकांश जनप्रतिनिधि जनता की मांग के अनुसार ही विकास कार्यों के लिए निधि का इस्तेमाल करते हैं।”
चुनाव के समय निधि रोकने वालों की संख्या बेहद कम: उनियाल
कैबिनेट मंत्री ने विधायक निधि को लेकर लगने वाले एक और आरोप का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जानबूझकर निधि रोककर रखने वाले विधायकों की संख्या बेहद कम है। उनके अनुसार अधिकांश जनप्रतिनिधि जनता की मांग और आवश्यकता के अनुसार ही विकास कार्यों के लिए निधि का उपयोग करते हैं, ताकि क्षेत्र में सड़क, पेयजल, विद्युत जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो सके।
विपक्ष के आरोपों के बीच सामने आया सरकार का पक्ष
गौरतलब है कि हाल के दिनों में विधायक निधि के खर्च को लेकर विपक्ष और कुछ अन्य पक्षों की ओर से सवाल उठाए जा रहे थे, जिसमें आरोप लगाया जा रहा था कि कई विधायकों ने अपनी निधि का समुचित उपयोग नहीं किया। इन्हीं सवालों के जवाब में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी और प्रक्रियागत पहलुओं को उजागर करते हुए स्पष्ट किया कि निधि खर्च न होने का मतलब निधि का दुरुपयोग या उपेक्षा नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर विधायक निधि खर्च को लेकर उठे सवालों पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में शेष बची निधि का उपयोग किस गति से किया जाता है और क्या इससे जनता के बीच उठ रहे सवाल शांत हो पाते हैं।
रिपोर्ट: आकाश, देहरादून
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