देहरादून। उत्तराखंड में अलग-अलग जिलों में आयोजित हो रही कैबिनेट बैठकों को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस की वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने इन बैठकों को लेकर धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इन आयोजनों को महज दिखावा और करदाताओं के पैसों की बर्बादी करार दिया है।
खानापूर्ति और राजस्व पर बोझ का आरोप
डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि सरकार बनबसा, हरिद्वार और पिथौरागढ़ जैसे क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित कर केवल खानापूर्ति कर रही है। उनका आरोप है कि इन आयोजनों के लिए भारी सरकारी अमला तैनात किया जाता है, जिससे सरकारी राजस्व पर बेवजह बोझ पड़ता है। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार जनता के पैसों का इस तरह इस्तेमाल उचित नहीं है।
बाइट: डॉ. प्रतिमा सिंह, वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस
उत्तराखंड में अलग-अलग जिलों में हो रही कैबिनेट बैठकों पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस की वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने धामी सरकार पर निशाना साधते हुए इन बैठकों को दिखावा और करदाताओं के पैसों की बर्बादी बताया। उनका आरोप है कि भारी सरकारी अमला तैनात कर राजस्व पर बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने हरिद्वार के लोगों को सचेत रहने की अपील करते हुए 2027 में सरकार की विदाई का दावा भी किया।
साढ़े नौ साल के कामकाज पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की बैठकों से सरकार के पिछले साढ़े नौ साल के कामकाज और उनकी नजर में जनविरोधी नीतियों पर पर्दा डाला जा सकता है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए इसे विपक्ष की ओर से जनता के मुद्दों को उठाने की कोशिश बताया।
हरिद्वार कैबिनेट को लेकर जताई आशंका
हरिद्वार में होने वाली कैबिनेट बैठक को लेकर डॉ. प्रतिमा सिंह ने स्थानीय लोगों को सचेत रहने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नजर खाली पड़ी जमीनों पर है और इसका फायदा भूमि से जुड़े निजी हितों को पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। यह कांग्रेस प्रवक्ता का राजनीतिक आरोप है, जिस पर सरकार का पक्ष अलग हो सकता है।
2027 को लेकर कांग्रेस का दावा
प्रतिमा सिंह ने दावा किया कि 2027 में धामी सरकार की विदाई तय है। उनके मुताबिक इसी कारण मुख्यमंत्री विदाई से पहले जिलों का दौरा पूरा कर रहे हैं। यह दावा कांग्रेस प्रवक्ता का राजनीतिक आकलन है। राज्य में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए राजनीतिक दलों की गतिविधियां अभी से तेज होती दिखाई दे रही हैं।
जिलों में कैबिनेट बैठक की व्यवस्था पर बहस
सरकारें आमतौर पर अलग-अलग जिलों में कैबिनेट बैठक आयोजित करने को जनता के करीब पहुंचने और स्थानीय मुद्दों पर निर्णय लेने की पहल के रूप में प्रस्तुत करती रही हैं। दूसरी ओर, विपक्ष ऐसे आयोजनों पर होने वाले खर्च और उनकी उपयोगिता को लेकर सवाल उठाता रहा है। इसी वजह से कैबिनेट बैठकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
लोकतंत्र में सवाल और जवाबदेही
लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को सरकार के फैसलों और खर्च पर सवाल उठाने का अधिकार है, वहीं सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह इन सवालों का तथ्यों के साथ जवाब दे। जनता के पैसों के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखना किसी भी सरकार के लिए अहम माना जाता है। ऐसे में कैबिनेट बैठकों के आयोजन और उन पर होने वाले खर्च को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बने रह सकते हैं।
सरकार और भाजपा के जवाब का इंतजार
अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस के इन आरोपों पर सरकार और भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।
रिपोर्ट: आकाश, देहरादून
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