देहरादून। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस के आरोपों को लेकर देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने की कोशिश सफल नहीं होगी। महापौर के अनुसार कांग्रेस भ्रम और सनसनी फैलाने की राजनीति कर रही है।
कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप
महापौर सौरभ थपलियाल ने कहा कि कांग्रेस के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर लगातार भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के आरोपों की सच्चाई अब सामने आ चुकी है।
आयोग के फैसले सर्वसम्मति से
महापौर ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी ने एसआईआर सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए हैं। उनके अनुसार आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
बाइट: सौरभ थपलियाल, महापौर, देहरादून
देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। अपनी बाइट में उन्होंने कहा कि कांग्रेस झूठ, भ्रम और सनसनी फैलाने की राजनीति कर रही है और उसका झूठ बेनकाब हो चुका है।
महापौर ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी ने एसआईआर सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय बिहार SIR और फॉर्म-6 की वैधता को पहले ही बरकरार रख चुका है।
सौरभ थपलियाल ने कहा कि कांग्रेस जिस प्रशासनिक पत्र का जिक्र कर रही है, उसका SIR या आयोग की नीति से कोई संबंध नहीं है। वह केवल एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति का आंतरिक मामला था। उन्होंने विपक्ष से संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा गिराने के बजाय तथ्यों और कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही दे चुका है वैधता
सौरभ थपलियाल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही बिहार SIR और फॉर्म-6 की वैधता को बरकरार रख चुका है। उन्होंने कहा कि जब देश की सर्वोच्च अदालत इस प्रक्रिया को वैध ठहरा चुकी है, तो उस पर बार-बार सवाल उठाना ठीक नहीं है।
प्रशासनिक पत्र को बताया आंतरिक मामला
कांग्रेस द्वारा उठाए गए तथाकथित प्रशासनिक पत्र के मुद्दे पर महापौर ने कहा कि उसका एसआईआर या आयोग की नीति से कोई संबंध नहीं था। उनके मुताबिक यह केवल एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति से जुड़ा आंतरिक मामला था।
विपक्ष को दी नसीहत
महापौर ने विपक्ष को नसीहत दी कि संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा गिराने के बजाय वे तथ्यों और कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाने का अधिकार सबके पास है, लेकिन आरोप तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होने चाहिए।
एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी फिलहाल थमती नहीं दिख रही है। एक ओर कांग्रेस आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि आयोग के सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बिहार SIR और फॉर्म-6 की वैधता बरकरार रखने का हवाला दिया और प्रशासनिक पत्र को एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति का आंतरिक मामला बताया। महापौर ने विपक्ष से तथ्यों और कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करने की अपील की। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है और यह राजनीतिक बहस किस दिशा में जाती है।
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रिपोर्ट: आकाश, देहरादून
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