अल्मोड़ा। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर नगर में विभिन्न स्थानों पर विधि-विधान के साथ मां नवदुर्गा की स्थापना की गई। अल्मोड़ा में नवदुर्गा स्थापना के साथ पूरे नगर में धार्मिक माहौल बन गया। मंदिरों और पूजा पंडालों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भक्तों ने श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर नवरात्र की शुरुआत की।
कलश यात्राओं में उमड़ी आस्था
विभिन्न मंदिरों और पूजा पंडालों में कलश यात्राएं निकाली गईं। इनमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मां दुर्गा के जयकारों से पूरे नगर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। कलश यात्राएं नवरात्र की शुरुआत की पारंपरिक पहचान मानी जाती हैं।
महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी
कलश यात्राओं में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर मां दुर्गा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। अलग-अलग स्थानों पर पूजा-अर्चना के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां दुर्गा की प्रतिमाओं और कलशों की स्थापना की गई। हर आयु वर्ग के लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को और भव्य बना दिया।
बाइट2-मनोज तिवारी विधायक।
सज गए पूजा स्थल, तेज हुईं धार्मिक गतिविधियां
नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही नगर के विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूजा स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। मंदिरों में भक्तों की मौजूदगी देखने को मिल रही है।
नवरात्र में नौ स्वरूपों की आराधना का महत्व
शारदीय नवरात्र नौ दिनों तक चलने वाला पर्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इन दिनों में सच्चे मन से की गई आराधना से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है। कलश स्थापना को नवरात्र की पूजा का पहला और महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। घर-घर और मंदिरों में कलश स्थापित कर नौ दिनों तक नियमित पूजा-अर्चना की परंपरा है। उत्तराखंड में भी यह पर्व पूरी आस्था के साथ मनाया जाता है।
अल्मोड़ा की सांस्कृतिक पहचान और नवरात्र
अल्मोड़ा को उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में स्थानीय लोगों की भागीदारी हमेशा उल्लेखनीय रहती है। नवरात्र के दौरान भी नगर में आस्था और परंपरा का संगम नजर आता है। कलश यात्राओं और पूजा-अर्चना के जरिए लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश भी देते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सावधानियां
नवरात्र के दिनों में मंदिरों और पूजा पंडालों में भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए इन बातों का ध्यान रखना उपयोगी माना जाता है:
- भीड़ वाले स्थानों पर बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
- कीमती सामान और नकदी संभालकर रखें।
- वाहन निर्धारित स्थानों पर ही खड़े करें।
- पूजा स्थलों पर साफ-सफाई और अनुशासन बनाए रखें।
- कोई संदिग्ध वस्तु या गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
आने वाले दिनों में होंगे धार्मिक कार्यक्रम
नवरात्र को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। आगामी दिनों में विभिन्न पूजा स्थलों पर नियमित पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मां दुर्गा की आराधना से पूरा नगर भक्तिरस में सराबोर नजर आ रहा है।
शांति और सौहार्द के साथ मनाएं पर्व
नवरात्र आस्था, संयम और आपसी सौहार्द का पर्व है। इन दिनों में लोग पूजा-अर्चना के साथ सेवा और सहयोग की भावना को भी आगे बढ़ाते हैं। नगर में जिस तरह श्रद्धालुओं ने कलश यात्राओं में भाग लिया, उससे साफ है कि लोगों में पर्व को लेकर गहरी श्रद्धा है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले नौ दिनों तक यह भक्तिमय धार्मिक माहौल बना रहेगा और श्रद्धालु शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन कर सकेंगे।
रिपोर्ट: राजीव कर्नाटक, अल्मोड़ा
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