चंपावत | रिपोर्ट: मनोज कपड़ी
उत्तराखंड के चंपावत जिले में मानदेय बढ़ाने और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां संगठन के बैनर तले रैली निकालकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचीं। यहां उन्होंने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी की और सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर कार्यकत्रियों को रोके जाने के बाद भी वह अपनी मांगों को लेकर डटी रहीं। बाद में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी मनीष कुमार से मुलाकात की और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
मानदेय बढ़ाने की लंबे समय से मांग
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कहना है कि वह लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रही हैं। संगठन के मुताबिक प्रदेश स्तर पर हुई वार्ता के दौरान मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
कार्यकत्रियों ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए उन्हें बच्चों के पोषण, महिलाओं से जुड़ी योजनाओं और सरकार की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इसके बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की मांग
प्रदर्शन कर रही कार्यकत्रियों ने सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि करीब 60 वर्ष की उम्र तक सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली आर्थिक सहायता भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं है।
संगठन की ओर से मांग की गई है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा यदि पेंशन की व्यवस्था संभव नहीं है तो कम से कम 10 लाख रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की गई है।
जिला अध्यक्ष मीना बोहरा ने कहा कि वर्ष 2026 में संगठन दूसरी बार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। इससे पहले भी करीब एक महीने तक आंदोलन किया गया था। उनके मुताबिक उस समय आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं हुआ।
चंपावत में 681 आंगनबाड़ी केंद्र
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में महिलाएं आंगनबाड़ी व्यवस्था के तहत काम कर रही हैं। चंपावत जिले में 681 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां करीब 1100 महिलाएं कार्यकत्री और सहायिका के रूप में सेवाएं दे रही हैं।
कार्यकत्रियों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। बच्चों के पोषण और महिलाओं से संबंधित योजनाओं के साथ-साथ सरकार की ओर से चलाए जाने वाले विभिन्न अभियानों में भी आंगनबाड़ी कर्मियों की भागीदारी रहती है।
जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद आंगनबाड़ी संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी मनीष कुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मानदेय बढ़ाने, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन या आर्थिक सहायता और अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
जिलाधिकारी ने कार्यकत्रियों की समस्याओं को सुना और संबंधित मांगों को उचित माध्यम से शासन स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही जिला कार्यक्रम अधिकारी को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से संवाद कर उनकी व्यावहारिक समस्याओं और सुझावों को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्रों में सुविधाओं को मजबूत करने की बात भी कही। उन्होंने एसआईआर समेत विभिन्न सरकारी अभियानों में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के योगदान की सराहना की।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आंगनबाड़ी संगठन ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। कार्यकत्रियों का कहना है कि अब केवल आश्वासन से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा और उनकी मांगों को शासन तथा कैबिनेट स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
फिलहाल चंपावत में हुए इस प्रदर्शन के बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की मांगों पर सरकार की ओर से लिए जाने वाले अगले निर्णय पर नजर बनी हुई है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि मानदेय और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा उनके प्रमुख मुद्दे हैं।
बाइट: मीना बोहरा, जिला अध्यक्ष, आंगनबाड़ी संगठन