चंपावत। चंपावत में सहकारी कर्मचारियों की हड़ताल शुरू हो गई है। लंबित मांगों को लेकर सहकारी समितियों के सचिव और कर्मचारियों ने गुरुवार को समितियों में तालाबंदी कर कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी। इससे जनपद की सहकारी समितियों में कामकाज ठप रहा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि 5 अक्टूबर तक मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो देहरादून में प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
समितियों में तालाबंदी, कलमबंद हड़ताल शुरू
चंपावत जनपद की सहकारी समितियों में गुरुवार को कामकाज प्रभावित रहा। सचिव एवं कर्मचारी संयुक्त यूनियन के अध्यक्ष केदार सिंह अधिकारी के नेतृत्व में सचिवों और कर्मचारियों ने समितियों में तालाबंदी की। इसके साथ ही उन्होंने कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी। कलमबंद हड़ताल में कर्मचारी कार्यालय का लिखा-पढ़ी वाला काम बंद रखते हैं।
लंबे समय से लंबित हैं मांगें
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से शासन और विभागीय स्तर पर लंबित हैं। उनके अनुसार, समाधान न होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। कर्मचारियों ने साफ किया है कि वे अपनी मांगों पर सकारात्मक निर्णय चाहते हैं।
बाइट – दिनेश तड़ागी अध्यक्ष
सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर अध्यक्ष दिनेश तड़ागी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सचिवों और कर्मचारियों की कई मांगें लंबे समय से शासन और विभागीय स्तर पर लंबित हैं। उनके अनुसार, समाधान न होने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
दिनेश तड़ागी ने बताया कि चंपावत जनपद में कर्मचारियों ने समितियों में तालाबंदी कर कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते सहकारी समितियों में कामकाज प्रभावित रहा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी मांगों पर सकारात्मक निर्णय चाहते हैं और जब तक ऐसा नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन फिलहाल 5 अक्टूबर तक जारी रहेगा। उनका कहना था कि अगर इस अवधि में शासन और विभाग की ओर से मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो कर्मचारी आंदोलन को और तेज करेंगे। इसके तहत देहरादून में प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
दिनेश तड़ागी बोले, लंबित मांगों पर निर्णय न होने से आंदोलन को मजबूर हुए कर्मचारी
अध्यक्ष के अनुसार, प्रदेशभर की सहकारी समितियों के सचिव और कर्मचारी इस मुद्दे पर एकजुट हैं। सभी कर्मचारी मिलकर शासन के सामने अपनी मांगें रखेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन और विभाग कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेंगे और समय रहते समाधान निकालेंगे, ताकि आंदोलन की नौबत न आए।
उन्होंने यह भी कहा कि हड़ताल से समितियों में कामकाज प्रभावित हो रहा है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी मांगों पर निर्णय न लेने वाले स्तर पर है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने पहले भी अपनी बात संबंधित स्तर तक पहुंचाई थी, पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
5 अक्टूबर तक जारी रहेगा आंदोलन
कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन फिलहाल 5 अक्टूबर तक जारी रहेगा। उनका कहना है कि अगर इस अवधि में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 5 अक्टूबर से देहरादून में प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
देहरादून में प्रदेशव्यापी धरने की चेतावनी
कर्मचारियों के अनुसार, प्रदेशभर की सहकारी समितियों के सचिव और कर्मचारी एकजुट होकर शासन के सामने अपनी मांगें रखेंगे। इस चेतावनी के बाद अब सबकी नजर शासन और विभाग के रुख पर टिकी है।
शासन और विभाग के कदम पर नजर
चंपावत में सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल से कामकाज प्रभावित हुआ है। अब देखना होगा कि 5 अक्टूबर से पहले शासन और विभाग कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।
कर्मचारियों की मांगों पर शासन और विभाग का रुख आने वाले दिनों में तय करेगा कि यह आंदोलन आगे बढ़ेगा या थमेगा। अब सभी की नजर 5 अक्टूबर पर टिकी है, जब तक शासन और विभाग का फैसला कर्मचारियों के आगे के आंदोलन की दिशा तय करेगा।
रिपोर्ट: मनोज कपरी, चंपावत
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