देहरादून। राजाजी टाइगर रिज़र्व (RTR) के मानद वन्यजीव वार्डन राजीव तलवार ने हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही को लेकर अहम बयान दिया है। उनके अनुसार दिल्ली-देहरादून हाईवे पर बने एलिवेटेड कॉरिडोर और चिड़ियापुर क्षेत्र में बन रहे रास्तों से जंगली जानवरों का आवागमन फिर से सुचारू हो गया है। यह बदलाव वन्यजीव संरक्षण के लिहाज़ से बड़ी राहत माना जा रहा है। साथ ही इससे सड़कों पर जाम और मानव-वन्यजीव टकराव की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
मोहंड मार्ग पर भारी ट्रैफिक से बाधित हुए थे गलियारे
राजीव तलवार ने बताया कि पहले मोहंड मार्ग पर चौबीसों घंटे भारी ट्रैफिक रहता था। वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण वन्यजीवों के पारंपरिक गलियारे यानी कॉरिडोर पूरी तरह बाधित हो चुके थे। जंगल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने वाले हाथी और अन्य जानवर सड़क पार नहीं कर पा रहे थे, जिससे उनका स्वाभाविक मूवमेंट लगभग रुक गया था।
वन्यजीव विशेषज्ञ लंबे समय से मानते रहे हैं कि जब जानवरों के रास्ते बंद हो जाते हैं, तो वे भोजन, पानी और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसे में सड़कों पर हादसों और टकराव का खतरा भी बढ़ जाता है।
बाइट- राजीव तलवार, मानद वन्यजीव वार्डन, राजाजी टाइगर रिज़र्व (RTR)
एलिवेटेड कॉरिडोर से बदली तस्वीर
राजीव तलवार के अनुसार दिल्ली-देहरादून हाईवे पर हजारों करोड़ रुपये की लागत से एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है। इसके साथ ही चिड़ियापुर क्षेत्र में भी नए रास्ते तैयार किए जा रहे हैं। इन निर्माण कार्यों का सीधा असर यह हुआ है कि वन्यजीवों का आवागमन एक बार फिर सुचारू हो गया है।
एलिवेटेड सड़क की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वाहन ऊपर से गुजरते हैं और ज़मीन का रास्ता जानवरों के लिए खुला रहता है। इससे हाथी और दूसरे वन्यजीव बिना किसी बाधा के अपने पुराने रास्तों से आ-जा सकते हैं। साथ ही वाहनों की रफ़्तार और शोर से उनका सीधा सामना भी कम होता है।
हजारों साल पुराने हैं हाथियों के गलियारे
राजीव तलवार ने स्पष्ट किया कि हाथियों के ये कॉरिडोर हजारों साल पुराने हैं। उनके मुताबिक हाथियों के रास्ते उनकी आनुवंशिक स्मृति (जेनेटिक मेमोरी) में दर्ज होते हैं। यही कारण है कि वे अपने पारंपरिक मार्गों को कभी नहीं छोड़ते, चाहे रास्ते में कितनी भी रुकावटें क्यों न आ जाएँ।
इसी वजह से जब कोई सड़क या निर्माण इन गलियारों के बीच आता है, तो हाथी बार-बार उसी रास्ते पर लौटने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उनके लिए सुरक्षित और खुला मार्ग उपलब्ध कराना ही सबसे कारगर उपाय माना जाता है। एलिवेटेड कॉरिडोर इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन
सरकार द्वारा विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर इन एलिवेटेड सड़कों को तैयार किया जा रहा है। एक ओर इनसे यात्रियों को बेहतर और तेज़ सड़क सुविधा मिल रही है। दूसरी ओर जंगल और उसके निवासियों के प्राकृतिक रास्तों को भी सुरक्षित रखा जा रहा है।
आज के दौर में जब सड़कों और बुनियादी ढांचे का विस्तार तेज़ी से हो रहा है, तब ऐसी परियोजनाएँ यह दिखाती हैं कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक भी हो सकते हैं। ज़रूरत इस बात की है कि भविष्य की परियोजनाओं में भी वन्यजीवों के रास्तों का ध्यान रखा जाए।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगेगी लगाम
राजीव तलवार का मानना है कि इन एलिवेटेड सड़कों से भविष्य में सड़कों पर जाम और मानव-वन्यजीव टकराव की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगेगी। जब जानवरों को अपने रास्ते खुले मिलेंगे, तो उनके आबादी वाले क्षेत्रों में भटकने की आशंका कम होगी। इससे आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और वन्यजीवों का जीवन भी सुरक्षित रहेगा।
रिपोर्ट: आकाश, देहरादून
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