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Madhya Pradesh

ग्वालियर की सड़कों पर सवाल: जांच में कई सैंपल फेल, टेस्ट रिपोर्ट की तारीखों ने बढ़ाई चिंता

Ravi Kumar
Last updated: 2026/09/20 at 6:06 PM
Ravi Kumar
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5 Min Read
ग्वालियर सड़क गुणवत्ता जांच में फेल सैंपल
ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता जांच में कई सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे
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ग्वालियर: शहर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर चल रही कानूनी सुनवाई में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे सड़क निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 18 सितंबर को पेश की गई जांच रिपोर्ट में कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहे तक सड़क से लिए गए कई सैंपल अलग-अलग गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में बिटुमिन कंटेंट, ग्रेडिंग, घनत्व और बाइंडर कंटेंट से जुड़ी कमियां सामने आई हैं।

Contents
कई सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेलटेस्ट रिपोर्ट की तारीखों ने खड़े किए सवालकई रिपोर्टों में सैंपल की लोकेशन नहींसड़क के गड्ढों की मरम्मत पर भी सवाल21 सितंबर को फिर होगी सुनवाईये भी पढ़ें: IIT रुड़की में CDS जनरल ने छात्रों को समझाया ‘DHARA’ का मंत्र

कई सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल

कोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक 1-A से 8-A तक कई सैंपलों की जांच की गई। कुछ नमूनों में बिटुमिन की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली। वहीं कुछ सैंपल घनत्व और बाइंडर कंटेंट के परीक्षण में असफल रहे, जबकि कुछ जगह ग्रेडिंग से संबंधित खामी भी दर्ज की गई।

जांच के दौरान कई सैंपलों में CRM नहीं मिलने की बात भी सामने आई। हालांकि सभी परीक्षणों का परिणाम एक जैसा नहीं था। कुछ नमूने OMC, MDD और CBR जैसे परीक्षणों में पास भी हुए। इसलिए रिपोर्ट को पूरी सड़क के पूरी तरह मानकविहीन होने के निष्कर्ष के रूप में देखना सही नहीं होगा। जांच में सड़क के अलग-अलग हिस्सों और अलग-अलग तकनीकी मानकों से जुड़ी कमियां दर्ज हुई हैं।

टेस्ट रिपोर्ट की तारीखों ने खड़े किए सवाल

मामले में सबसे अहम सवाल नगर निगम की DPR में शामिल टेस्ट रिपोर्ट की तारीखों को लेकर सामने आया। दस्तावेजों के अनुसार DBM और BC के सैंपल 10 जुलाई 2024 को लिए गए थे और उनकी टेस्ट रिपोर्ट अगले ही दिन यानी 11 जुलाई को तैयार बताई गई।

वहीं, इसी रिकॉर्ड में जॉब मिक्स डिजाइन की तारीख 16 सितंबर 2024 दर्ज है। यानी सैंपल लेने और टेस्ट रिपोर्ट तैयार होने के बाद जॉब मिक्स डिजाइन की तारीख आने का अंतर दो महीने से ज्यादा का दिखाई देता है। इसी वजह से हाईकोर्ट ने संबंधित रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और राजनंदिनी एंटरप्राइजेज एंड कंसल्टेंसी से जुड़े मूल दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।

कई रिपोर्टों में सैंपल की लोकेशन नहीं

जांच में टेस्ट रिपोर्ट की गुणवत्ता और रिकॉर्ड रखने के तरीके से जुड़े दूसरे सवाल भी सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम की DPR में शामिल ज्यादातर टेस्ट रिपोर्ट सरकारी प्रयोगशाला की बजाय राजनंदिनी एंटरप्राइजेज एंड कंसल्टेंसी की थीं।

इसके अलावा कई रिपोर्टों में यह स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं था कि सड़क के किस हिस्से या किस स्थान से सैंपल लिया गया था। जांच के दौरान कुछ जगह अर्थवर्क से जुड़े रिकॉर्ड में भी अंतर पाया गया। कहीं अर्थवर्क का उल्लेख नहीं मिला, तो कुछ स्थानों पर दस्तावेजों में काम दर्ज होने के बावजूद जांच रिपोर्ट में अर्थवर्क नहीं किए जाने की बात सामने आई।

सड़क के गड्ढों की मरम्मत पर भी सवाल

कोर्ट के सामने नगर निगम के सड़क मरम्मत कॉन्ट्रैक्ट की तकनीकी शर्तों का भी उल्लेख हुआ। नियमों के अनुसार सड़क पर गड्ढे की पहचान होने के बाद अधिकतम 48 घंटे में उसकी मरम्मत की जानी है। इसके लिए गड्ढे को काटना, ढीली सामग्री और मलबा हटाना, पानी निकालना, निर्धारित सामग्री डालना और उचित तरीके से कंप्रेशन करना जरूरी है।

लेकिन कोर्ट में पेश तस्वीरों को लेकर भी सवाल उठे। तस्वीरों में सैंपल लेने के लिए बनाए गए गड्ढों को भरते समय मलबे के ऊपर बिटुमिन की पतली परत दिखाई देने की बात सामने आई। हाईकोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर से पूछा है कि तकनीकी शर्तों में मलबा और ढीली सामग्री हटाने का प्रावधान होने के बावजूद इस तरह मरम्मत किस नियम या स्पेसिफिकेशन के तहत की गई।

21 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

मामले में हाईकोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। उस दौरान बाकी दो सैंपलों की रिपोर्ट और नगर निगम कमिश्नर का शपथपत्र भी अदालत के सामने पेश किया जाना है।

ग्वालियर की सड़कों से जुड़ा मामला अब केवल गड्ढों या सड़क की ऊपरी सतह तक सीमित नहीं रहा है। जांच में निर्माण सामग्री, तकनीकी मानक, सैंपलिंग प्रक्रिया, टेस्ट रिपोर्ट की तारीख, मूल दस्तावेज और मरम्मत के तरीके—इन सभी पहलुओं पर सवाल सामने आए हैं। अदालत में आगे होने वाली सुनवाई और रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होगा कि इन तकनीकी और दस्तावेजी विसंगतियों पर संबंधित विभाग क्या जवाब देता है।

ये भी पढ़ें: IIT रुड़की में CDS जनरल ने छात्रों को समझाया ‘DHARA’ का मंत्र

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