उत्तराखंड की सियासत में बड़ा भूचाल आया है। इस Harish Rawat Resignation के तहत पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला उनके निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना के ठिकाने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के एक दिन बाद आया है। रावत ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे का ऐलान किया।
क्या है पूरा मामला
ED ने 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में देहरादून में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें चंदन सिंह जीना का घर भी शामिल था। एजेंसी को वहां से 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना और 12 लग्जरी घड़ियां मिली हैं। इसके अलावा जीना और उनके परिवार के बैंक खातों में मौजूद 52.16 लाख रुपये भी फ्रीज किए गए हैं। जीना रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में OSD रह चुके हैं और फिलहाल उनके PA हैं।
रावत ने बताई इस्तीफे की वजह
इस Harish Rawat Resignation पर सफाई देते हुए रावत ने कहा कि वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष पर कोई सवाल उठे। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले माहौल बिगाड़ने के लिए यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी की साख बचाने के लिए वे प्रदेश कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति, दोनों पदों से अलग हो रहे हैं।
भर्ती घोटाले पर भी दी सफाई
अपने कार्यकाल के दौरान 42 हजार से ज्यादा सरकारी भर्तियों का जिक्र करते हुए रावत ने कहा कि यदि प्रक्रिया में अनजाने में कोई चूक हुई हो, तो वे राज्य की जनता से माफी मांगते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिकायत मिलते ही भर्ती आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष को हटा दिया गया था।
जांच एजेंसियों को खुली चुनौती
रावत ने कहा कि अगर किसी के पास भर्तियों में उनके दखल का कोई सबूत है, तो वह सीधे CBI, ED या पुलिस को सौंपे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कोई गलती साबित होती है, तो कानून जो भी सजा देगा, वे उसे भुगतने के लिए तैयार हैं। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इसका असर उत्तराखंड की राजनीति पर साफ दिख सकता है।
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