सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के बीच महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि का बयान सामने आया है। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि सरकारी कलेक्ट्रेट परिसर का इस्तेमाल प्रशासनिक कार्यों के लिए होना चाहिए। उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाने वालों को पाकिस्तान या बांग्लादेश जाने की बात भी कही।
SSP से मुलाकात कर कार्रवाई की तारीफ
स्वामी प्रबोधानंद गिरि उत्तराखंड से सहारनपुर पहुंचे और SSP कार्यालय जाकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई के लिए पुलिस और प्रशासन की तारीफ की। उनका कहना था कि कलेक्ट्रेट शासन और प्रशासन से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र है, इसलिए वहां प्रशासनिक गतिविधियां ही होनी चाहिए।
महामंडलेश्वर ने दावा किया कि परिसर में लंबे समय से कुछ ऐसी गतिविधियां चल रही थीं, जिन पर कार्रवाई की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपने स्तर पर मनमाने तरीके से कदम नहीं उठाया, बल्कि मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद कार्रवाई की गई।
कुएं जैसी संरचना को लेकर भी उठे सवाल
कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में सामने आई कुएं जैसी संरचना का मुद्दा भी बयान में उठा। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने इसे हिंदू धार्मिक परंपरा से जोड़ते हुए जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि इसी संरचना के ऊपर मस्जिद का निर्माण किए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, उन्होंने खुद यह भी कहा कि इस संरचना की वास्तविक स्थिति और इतिहास को लेकर जांच अभी जारी है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
पुरानी ईंटों पर भी चर्चा
महामंडलेश्वर ने कलेक्ट्रेट परिसर में मिली कुछ ईंटों पर दर्ज 1906 और 1909 जैसे वर्षों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन तारीखों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक ये तारीखें किसी ईंट-भट्ठे के ट्रेडमार्क से संबंधित भी हो सकती हैं और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी।
वहीं, जमीन को वक्फ संपत्ति बताए जाने के दावे पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज हैं तो संबंधित पक्ष उन्हें अदालत के सामने रख सकता है।
‘दिक्कत है तो पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाइए’
मस्जिद हटाए जाने की कार्रवाई पर आपत्ति जताने वालों को लेकर स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को कार्रवाई से परेशानी है तो वह पाकिस्तान या बांग्लादेश जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी के पास वहां जाने का किराया नहीं है तो वह उनसे पैसे ले सकता है।
हालांकि, अपने बयान में महामंडलेश्वर ने यह भी कहा कि भारत संविधान और कानून के अनुसार चलता है। यदि किसी पक्ष को प्रशासन की कार्रवाई गलत लगती है तो वह हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट समेत उपलब्ध कानूनी रास्तों का इस्तेमाल कर सकता है।
योगी सरकार की कानून व्यवस्था की तारीफ
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की कानून व्यवस्था की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून का पालन जरूरी है और किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए।
सहारनपुर का यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक जांच के साथ आगे बढ़ रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर की संरचना, जमीन से जुड़े दावों और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी दलीलें हैं। ऐसे में अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।