ब्रेकिंग न्यूज़ | रामपुर। जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की पकने के कगार पर पहुंची खड़ी फसल पर बारिश का सबसे ज्यादा असर दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में खेतों में पानी भरने से फसल गिर गई है, जबकि कुछ स्थानों पर धान की फसल पानी में डूब गई है। इससे किसानों को उत्पादन प्रभावित होने के साथ आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।
रामपुर जिले की सदर, स्वार, बिलासपुर, टांडा, शाहबाद, सैफनी और मिलक तहसील क्षेत्रों में धान की फसल प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर कई क्षेत्रों में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक फसल प्रभावित होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं, जिन खेतों में पानी अधिक जमा हो गया है, वहां नुकसान का प्रतिशत इससे ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है।
खेतों में गिर गई पकी धान की फसल
लगातार बारिश के कारण खेतों में पककर तैयार हो रही धान की फसल कई स्थानों पर जमीन पर गिर गई है। किसानों के मुताबिक, फसल गिरने के बाद उसकी कटाई में भी परेशानी बढ़ सकती है। वहीं, जिन खेतों में पानी भरा हुआ है, वहां लंबे समय तक पानी जमा रहने से धान की बालियों और दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
कुछ प्रभावित क्षेत्रों में 30 से 35 प्रतिशत तक फसल नुकसान का अनुमान स्थानीय स्तर पर लगाया जा रहा है। हालांकि, कृषि विभाग की ओर से फिलहाल करीब 20 प्रतिशत तक फसली नुकसान का आकलन बताया गया है। वास्तविक नुकसान की स्थिति स्थलीय निरीक्षण और सर्वे के बाद अधिक स्पष्ट होगी।
रामपुर में 1.26 लाख हेक्टेयर में हुई धान की खेती
इस वर्ष रामपुर जिले में करीब 1.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है। ऐसे में लगातार बारिश का असर बड़ी संख्या में किसानों की फसल पर पड़ने की आशंका है। धान की फसल इस समय कई क्षेत्रों में पकने की अवस्था में है, इसलिए बारिश से होने वाला नुकसान किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के समय मौसम खराब होने से उनकी मेहनत और लागत दोनों प्रभावित हो सकती हैं। खेतों में पानी भरने से कटाई में देरी होने और फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की चिंता भी बनी हुई है।
प्रशासन ने किसानों से सतर्क रहने की अपील की
बारिश और आंधी के कारण फसलों को नुकसान की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से किसानों से सतर्कता बरतने की अपील की गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसल की स्थिति पर नजर रखें और नुकसान होने की स्थिति में संबंधित विभाग तथा बीमा कंपनी को समय से सूचना दें।
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार, जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा कराया है और बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से फसल को नुकसान हुआ है, वे क्षतिपूर्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
72 घंटे के भीतर दर्ज कराएं शिकायत
कृषि विभाग के अनुसार, फसल बीमा कराने वाले किसान फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर 14447 पर दर्ज करा सकते हैं। समय पर सूचना देने से नुकसान के दावे की प्रक्रिया में आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
वहीं, जिन किसानों की फसल में 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें अपनी संबंधित तहसील से भी संपर्क करने की सलाह दी गई है। विभाग के मुताबिक, ऐसे मामलों में नियमानुसार स्थलीय जांच कराकर फसल क्षति का आकलन किया जा सकता है और पात्रता के अनुसार क्षतिपूर्ति के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों को सर्वे और मुआवजे का इंतजार
लगातार बारिश से प्रभावित किसान अब फसल नुकसान के सर्वे और राहत प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि प्रभावित खेतों का जल्द से जल्द स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, ताकि वास्तविक नुकसान का आकलन हो सके।
फिलहाल बारिश का दौर किसानों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। खेतों में जमा पानी और गिरी हुई धान की फसल को लेकर किसान परेशान हैं। प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से किसानों को फसल बीमा और नुकसान की सूचना समय पर देने की सलाह दी गई है।
रिपोर्टर: अफ्फान अहमद
किसान बाइट: अरविन्द यादव