रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चीड़बासा स्लाइडिंग जोन में देर रात एक बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया गया। पहाड़ी से लगातार गिर रहे पत्थरों और मलबे के बीच SDRF, NDRF और DDRF की संयुक्त टीमों ने करीब 1500 यात्रियों को सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड पहुंचाया। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।
चीड़बासा हैलीपैड के पास स्लाइडिंग से फंसे यात्री
27 सितंबर की देर रात चीड़बासा हैलीपैड के पास पहाड़ी से अचानक स्लाइडिंग होने लगी। इसके कारण बड़ी संख्या में यात्री मार्ग के दूसरी ओर फंस गए। अंधेरा, ऊबड़-खाबड़ रास्ता और पहाड़ी से लगातार गिरते पत्थरों ने हालात को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल राहत कार्य शुरू करना जरूरी हो गया।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची SDRF
घटना की जानकारी मिलते ही राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीम मौके पर पहुंच गई। स्थिति का जायजा लेने के बाद SDRF ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल (NDRF) और जिला आपदा प्रतिवादन बल (DDRF) के साथ मिलकर संयुक्त रेस्क्यू अभियान शुरू किया। तीनों बलों के बीच बेहतर तालमेल के कारण राहत कार्य तेजी से आगे बढ़ पाया।
पत्थरों के बीच सावधानी से पार कराया गया स्लाइडिंग जोन
रेस्क्यू के दौरान सबसे बड़ी चुनौती स्लाइडिंग जोन को सुरक्षित रूप से पार कराना था। पहाड़ी से रुक-रुककर पत्थर और मलबा गिर रहा था, जिससे जोखिम लगातार बना हुआ था। इसके बावजूद रेस्क्यू टीमों ने धैर्य और सतर्कता के साथ यात्रियों को छोटे-छोटे समूहों में आगे बढ़ाया। जवानों ने यात्रियों का मार्गदर्शन किया और हर कदम पर उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा।
1500 यात्री गौरीकुंड रवाना
लंबे चले इस अभियान के बाद करीब 1500 यात्रियों को स्लाइडिंग जोन के दूसरी ओर सुरक्षित पहुंचाया गया। इसके बाद उन्हें गौरीकुंड के लिए रवाना किया गया, जहां उनके ठहरने और आगे की यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। संकट की घड़ी में अचानक मदद मिलने से यात्रियों ने राहत की सांस ली और रेस्क्यू टीमों का आभार जताया।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सतर्कता जरूरी
पर्वतीय क्षेत्रों में स्लाइडिंग जोन यात्रा के दौरान बड़ी चुनौती बने रहते हैं। ऐसे में यात्रियों से अपील की जाती है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और मार्ग की ताजा जानकारी जरूर लें। चिन्हित स्लाइडिंग जोन में रुकने से बचें, प्रशासन और आपदा प्रतिवादन बलों के निर्देशों का पालन करें और रात के समय जोखिम भरे हिस्सों में यात्रा करने से परहेज करें।
संयुक्त प्रयासों से टला बड़ा खतरा
SDRF, NDRF और DDRF की संयुक्त कार्रवाई से एक बड़ा खतरा टल गया। रेस्क्यू टीमों की तत्परता और साहस के कारण हजारों की भीड़ जैसे हालात में भी 1500 यात्रियों की जान सुरक्षित रही। प्रशासन की ओर से मार्ग की निगरानी जारी है और स्थिति सामान्य होने तक जरूरी सावधानी बरती जा रही है।
रेस्क्यू टीमों की चुनौतियां और जवानों का साहस
चीड़बासा रेस्क्यू के दौरान टीमों के सामने कई मुश्किलें थीं। देर रात का समय था और पहाड़ी से लगातार पत्थर व मलबा गिर रहा था। ऐसे हालात में एक छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। इसके बावजूद SDRF, NDRF और DDRF के जवानों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना यात्रियों को स्लाइडिंग जोन से बाहर निकालने का काम जारी रखा। जवानों ने पहाड़ी की स्थिति पर लगातार नजर रखी और सही मौका देखकर यात्रियों को आगे बढ़ाया। संयुक्त टीम की योजना और आपसी तालमेल का ही नतीजा रहा कि करीब 1500 यात्रियों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया जा सका। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर यह अभियान आपदा प्रतिवादन बलों की तैयारी और क्षमता का उदाहरण माना जा रहा है।
रिपोर्टर: पंतरुण, रुद्रप्रयाग
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