साइबर फ्रॉड के मामलों में बैंक अकाउंट फ्रीज होने की समस्या से परेशान ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रस्तावित नए KYC फ्रेमवर्क में बैंक खाते की पूरी रकम रोकने के बजाय संदिग्ध या विवादित राशि पर ही अस्थायी रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।
इस बदलाव का मकसद साइबर अपराध और मनी म्यूल अकाउंट पर कार्रवाई करते हुए उन ग्राहकों के पैसे को सुरक्षित रखना है, जिनके खाते में अनजाने में कोई संदिग्ध ट्रांजेक्शन पहुंच गया हो।
विवादित रकम पर लगेगा डेबिट होल्ड
नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अगर किसी बैंक खाते में 1,000 रुपये या उससे अधिक का संदिग्ध लेन-देन सामने आता है, तो बैंक पूरे खाते को फ्रीज करने के बजाय संबंधित रकम पर अस्थायी डेबिट होल्ड लगा सकेंगे।
इसका मतलब यह है कि खाते में मौजूद बाकी रकम का इस्तेमाल ग्राहक सामान्य बैंकिंग जरूरतों के लिए कर सकेगा। फिलहाल साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में पूरे खाते पर रोक लग जाने से ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
60 दिन तक रह सकता है अस्थायी होल्ड
RBI के प्रस्तावित फ्रेमवर्क में अस्थायी डेबिट होल्ड की अधिकतम अवधि 60 दिन रखी गई है। हालांकि, अगर जांच एजेंसी या अदालत की ओर से अलग निर्देश मिलता है तो स्थिति उसके अनुसार आगे बढ़ सकती है।
नए सिस्टम में बैंक संदिग्ध लेन-देन की पहचान के लिए AI और मशीन लर्निंग आधारित तकनीकों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। 1,000 रुपये या उससे अधिक के संदिग्ध ट्रांजेक्शन की पहचान होने पर बैंक तत्काल कार्रवाई कर सकेंगे।
ग्राहक को जवाब देने का मिलेगा मौका
प्रस्तावित नियमों में ग्राहक के अधिकारों का भी ध्यान रखा गया है। बैंक को संदिग्ध लेन-देन पर कार्रवाई करने के बाद ग्राहक को डिजिटल माध्यम से या अगले दिन तक लिखित सूचना देनी होगी।
इसके बाद ग्राहक को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए 20 दिनों तक का समय मिलेगा। अगर बैंक ग्राहक की सफाई से संतुष्ट होता है तो विवादित रकम पर लगाया गया होल्ड हटाया जा सकेगा।
जवाब नहीं मिला तो साइबर एजेंसी को रिपोर्ट
अगर ग्राहक की ओर से निर्धारित समय में कोई जवाब नहीं मिलता या बैंक उसकी सफाई से संतुष्ट नहीं होता, तो मामले को आगे साइबर पुलिस या संबंधित साइबर क्राइम पोर्टल को रिपोर्ट किया जा सकता है।
ड्राफ्ट में यह भी व्यवस्था बताई गई है कि पुलिस या जांच एजेंसी की ओर से आगे कोई निर्देश नहीं मिलने की स्थिति में तय प्रक्रिया के तहत रोक हटाई जा सकती है।
1 अप्रैल 2027 से लागू करने की तैयारी
RBI के प्रस्तावित बदलाव को ‘Reserve Bank of India (Know Your Customer – KYC) Amendment Directions, 2026’ से जोड़ा गया है। यह मौजूदा KYC निर्देशों में संशोधन के तौर पर लाया जा रहा है।
प्रस्ताव के मुताबिक नए प्रावधानों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करना जरूरी होगा। हालांकि, बैंक इससे पहले भी इन नियमों को अपनाने का विकल्प रख सकते हैं।
ग्राहकों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
साइबर फ्रॉड के मामलों में कई बार किसी व्यक्ति के बैंक खाते में संदिग्ध रकम पहुंचने के कारण पूरा अकाउंट जांच के दायरे में आ जाता है। इससे खाते में मौजूद वैध बचत का इस्तेमाल भी प्रभावित हो सकता है।
RBI का प्रस्तावित मॉडल इसी समस्या को कम करने की कोशिश करता है। अगर नियम अंतिम रूप में इसी तरह लागू होते हैं, तो संदिग्ध रकम पर कार्रवाई के साथ ग्राहक के बाकी वैध पैसों और सामान्य बैंकिंग गतिविधियों को जारी रखने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, फिलहाल ये प्रावधान ड्राफ्ट स्तर पर हैं। अंतिम नियम और उनके लागू होने की प्रक्रिया RBI के अंतिम निर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।