बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़े मामले में बड़ा फैसला आया है। देश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने अवामी लीग के सात वरिष्ठ नेताओं को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई है। इस सूची में पार्टी के पूर्व महासचिव और मंत्री ओबैदुल कादर का नाम भी शामिल है।
फैसला मंगलवार को न्यायमूर्ति नजरुल इस्लाम चौधरी की अध्यक्षता वाली ट्रिब्यूनल-2 ने सुनाया। अदालत में बाकी पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति मो. मंजुरुल बशिद और न्यायमूर्ति नूर मोहम्मद शाहरीयार कबीर थे। सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चला, क्योंकि वे फिलहाल फरार हैं।
किन नेताओं पर गिरी गाज?
मौत की सजा पाने वालों में ओबैदुल कादर के अलावा अवामी लीग के संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम और पूर्व राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात शामिल हैं।
इसके अलावा पार्टी के युवा और छात्र संगठनों से जुड़े शेख फजल शम्स पराश, मैनुल हुसैन खान निखिल, सद्दाम हुसैन और शेख वली आसिफ एनां को भी दोषी ठहराया गया है।
अभियोजन पक्ष ने इन नेताओं पर 2024 के आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा भड़काने, हत्या में भूमिका निभाने और आंदोलन को दबाने की साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए थे।
आरक्षण विरोध से शुरू हुआ था आंदोलन
बांग्लादेश में 2024 का छात्र आंदोलन सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के विरोध से शुरू हुआ था। शुरुआत में यह छात्रों का सीमित प्रदर्शन था, लेकिन हालात तेजी से बदलते गए और आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ व्यापक रूप ले लिया।
जुलाई और अगस्त 2024 में राजधानी ढाका समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन और हिंसा हुई। स्थिति इतनी बिगड़ी कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा और वह भारत चली गईं।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के अनुमान के मुताबिक, 15 जुलाई से 5 अगस्त के बीच हुई हिंसा में करीब 1,400 लोगों की जान गई थी।
नेताओं पर क्या आरोप लगाए गए?
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि अवामी लीग और उससे जुड़े युवा व छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किया गया।
ओबैदुल कादर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सक्रिय करने का आरोप लगाया गया। जांच में सामने आए एक फॉरेंसिक ऑडियो का भी मामले में हवाला दिया गया था।
पूर्व राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात पर मीडिया से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाने का आरोप था। वहीं बहाउद्दीन नसीम पर आंदोलन के दौरान पार्टी की प्रतिक्रिया को संगठित करने का आरोप लगाया गया।
पांच नेताओं की संपत्ति भी जब्त होगी
मौत की सजा के अलावा अदालत ने पांच दोषियों की 50 प्रतिशत चल और अचल संपत्ति जब्त करने का निर्देश दिया है। अदालत के मुताबिक, इन संपत्तियों से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल हिंसा में मारे गए लोगों और घायलों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए किया जाएगा।
यह फैसला बांग्लादेश में 2024 के आंदोलन से जुड़े मामलों में अवामी लीग के नेताओं पर हो रही कार्रवाई को और गंभीर बनाता है।
शेख हसीना को पहले ही सुनाई जा चुकी है सजा
अवामी लीग के इन सात नेताओं से पहले बांग्लादेश का अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण शेख हसीना के खिलाफ भी फैसला सुना चुका है। नवंबर 2025 में अदालत ने उन्हें 2024 के आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा दी थी।
पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी उसी मामले में मौत की सजा मिली थी। वहीं पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पांच साल की सजा सुनाई गई थी।
शेख हसीना फिलहाल भारत में हैं। ऐसे में बांग्लादेश के इस नए फैसले के बाद अब उनकी पार्टी के नेताओं की स्थिति और दोनों देशों के बीच इस मामले को लेकर आगे की कानूनी व कूटनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रहेगी।