वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिका को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना के करीब 45 रीपर ड्रोन नष्ट हो चुके हैं। यह संख्या अमेरिकी MQ-9 Reaper बेड़े का लगभग 25 प्रतिशत बताई जा रही है। ऐसे में युद्ध का असर केवल मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिका की सैन्य क्षमता और हथियारों के भंडार पर भी दबाव बढ़ने लगा है।
रीपर ड्रोन का नुकसान क्यों है बड़ी चिंता?
रीपर ड्रोन अमेरिकी सेना की सबसे महत्वपूर्ण निगरानी और हमला करने वाली प्रणालियों में गिने जाते हैं। इनका उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और सटीक हमले करने के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में रीपर ड्रोन का नुकसान अमेरिका की ऑपरेशनल क्षमता को प्रभावित कर सकता है। खासकर तब, जब युद्ध कई मोर्चों पर फैला हुआ हो और लगातार निगरानी की जरूरत बनी हुई हो।
हथियारों के भंडार पर भी बढ़ा दबाव
सिर्फ ड्रोन ही नहीं, बल्कि मिसाइलों और अन्य सैन्य उपकरणों की खपत भी तेजी से बढ़ी है। लंबे समय तक चले किसी भी संघर्ष में हथियारों की आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती बन जाती है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो अमेरिका को अपने रक्षा उत्पादन को और तेज करना पड़ सकता है।
युद्ध के दौरान इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक हथियारों की लागत भी काफी अधिक होती है, जिससे सैन्य बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
ईरान की वायु रक्षा बनी चुनौती
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की एयर डिफेंस प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं ने अमेरिकी अभियानों को मुश्किल बनाया है। कई रीपर ड्रोन कथित तौर पर मिसाइल हमलों या वायु रक्षा प्रणालियों की चपेट में आए।
यही वजह है कि अमेरिकी सैन्य रणनीतिकार अब ड्रोन ऑपरेशन की सुरक्षा और नई तकनीकों पर अधिक जोर दे रहे हैं।
रक्षा उद्योग के सामने बढ़ी जिम्मेदारी
युद्ध के कारण ड्रोन, मिसाइल और अन्य सैन्य उपकरणों की मांग बढ़ गई है। अमेरिकी रक्षा कंपनियों के सामने अब खोए हुए संसाधनों की भरपाई करने और उत्पादन बढ़ाने की चुनौती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन की भूमिका और बढ़ेगी, इसलिए रीपर ड्रोन जैसे प्लेटफॉर्म की उपलब्धता बनाए रखना अमेरिका के लिए रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है।
क्या पड़ेगा युद्ध पर असर?
45 ड्रोन का नुकसान किसी भी सैन्य अभियान के लिए बड़ा झटका माना जाता है। हालांकि अमेरिका के पास अभी भी उन्नत सैन्य संसाधनों का विशाल नेटवर्क मौजूद है, लेकिन लगातार हो रहे नुकसान भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव आगे किस दिशा में बढ़ता है और इसका वैश्विक सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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