ऋषिकेश की गलियों में सालों से एक नाम खौफ का पर्याय बना हुआ था — जग्गा। अब आखिरकार पुलिस ने उस खौफ पर लगाम कस दी है। पुलिस ने जगजीत उर्फ जग्गा और उसके गैंग के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर तीन आरोपियों को धर दबोचा है। गैंग का चौथा सदस्य रवि गुप्ता अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है, और टीमें उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
कैसे चलता था खौफ का कारोबार
पुलिस जांच में सामने आया कि जग्गा अपने साथियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित नेटवर्क चला रहा था। तरीका सीधा था — जमीन और पारिवारिक झगड़ों में घुसना, फिर पीड़ितों को अपनी शर्तों पर ‘सुलह’ के लिए मजबूर करना। जो नहीं माने, उन्हें धमकाया गया, कुछ मामलों में मारपीट तक हुई।
ब्लैकमेलिंग का काला खेल
पुलिस के मुताबिक गिरोह का एक और खतरनाक पहलू सामने आया — लोगों की निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उगाही करना। कई मामलों में तो आरोपी सीधे घरों में घुसकर मारपीट करने से भी नहीं हिचके। यही वजह थी कि इलाके में लोग शिकायत दर्ज कराने से भी कतराते रहे।
दस साल, ग्यारह मुकदमे, और आखिरकार कार्रवाई
गैंग लीडर जग्गा के खिलाफ 2016 से 2026 के बीच कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे। स्थानीय लोगों के बीच भय के इस लगातार बढ़ते माहौल को देखते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देश पर आखिरकार गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई का फैसला लिया गया। कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद कोतवाली ऋषिकेश में मुकदमा संख्या 405/2026 दर्ज हुआ, और इसके बाद जगजीत उर्फ जग्गा, प्रणव उर्फ राघव बत्रा और दीपेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया।
घर से मिला ‘KING OF उत्तराखंड’ का बोर्ड
गिरफ्तारी के दौरान जग्गा के घर से एक चौंकाने वाली चीज़ बरामद हुई — एक बोर्ड, जिस पर लिखा था ‘KING OF उत्तराखंड’। पुलिस का मानना है कि यह बोर्ड आरोपी के उसी रौब और दबदबे की कहानी बयां करता है, जिसके दम पर वह सालों तक इलाके में दहशत कायम किए हुए था।
अब उठ रहा है एक बड़ा सवाल
गिरफ्तारी के बाद भी एक सवाल हवा में तैर रहा है — अगर जग्गा के खिलाफ 2016 से लगातार मामले दर्ज होते रहे, और वह खुलेआम सोशल मीडिया पर अपने वीडियो वायरल करता रहा, तो पुलिस को गैंगस्टर एक्ट लगाने में इतना वक्त क्यों लगा? फिलहाल तीनों आरोपी सलाखों के पीछे हैं, जांच जारी है, और चौथे फरार आरोपी की तलाश भी बदस्तूर चल रही है।