चम्पावत। सहकारिता विभाग के सचिवों और कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुई कलमबंद हड़ताल लगातार जारी है। कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में 1 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार शुरू किया था। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
1 अक्टूबर से शुरू हुआ कार्य बहिष्कार
सहकारिता विभाग के सचिवों और कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 1 अक्टूबर से कलमबंद हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन के शुरुआती चरण में 1 से 4 अक्टूबर तक कर्मचारी अपने-अपने मुख्यालयों में रहकर हड़ताल पर रहे। इस दौरान उन्होंने कार्य बहिष्कार कर अपनी नाराजगी जाहिर की और मांगों पर जल्द निर्णय लेने की बात कही।
आंदोलन को मिला प्रदेशव्यापी स्वरूप
शुरुआती चार दिनों की हड़ताल के बावजूद मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद कर्मचारियों ने आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप देने का फैसला किया। अब कर्मचारी देहरादून स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय के सामने मयावाला में धरने पर बैठे हैं। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहकर अपनी मांगों के समर्थन में डटे हुए हैं।
लंबे समय से उठाई जा रही हैं मांगें
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लंबे समय से उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक शासन स्तर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। उनका कहना है कि बार-बार अपनी बात रखने के बाद भी समाधान की दिशा में आगे नहीं बढ़ा गया, इसलिए उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। कर्मचारी चाहते हैं कि शासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और जल्द निर्णय ले।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो हड़ताल आगे भी जारी रहेगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं और शासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रहे हैं।
विभागीय कामकाज पर पड़ सकता है असर
कलमबंद हड़ताल के चलते सहकारिता विभाग से जुड़े कामकाज पर असर पड़ने की संभावना बनी हुई है। विभाग से संबंधित कार्यों के लिए कार्यालयों में पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है, तो विभागीय कामकाज पर इसका प्रभाव और बढ़ सकता है।
शासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें शासन स्तर से सकारात्मक पहल की उम्मीद है। उनका मानना है कि बातचीत और समाधान के जरिए ही इस स्थिति का हल निकाला जा सकता है। कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं और समाधान मिलने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
आगे की राह
सहकारिता विभाग में जारी कलमबंद हड़ताल अब प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुकी है। कर्मचारी अपनी मांगों पर डटे हैं और शासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दूसरी ओर, हड़ताल लंबी खिंचने से विभागीय कामकाज प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में बातचीत के जरिए समाधान निकलना दोनों पक्षों के लिए बेहतर माना जा रहा है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि शासन कब और क्या निर्णय लेता है।
निष्कर्ष
सहकारिता विभाग के सचिवों और कर्मचारियों की हड़ताल अभी जारी है और कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। अब सभी की नजरें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने पर ही आंदोलन समाप्त होने के आसार हैं।
रिपोर्ट: मनोज कापड़ी, चम्पावत
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