नई दिल्ली/लखनऊ: समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के 21 राज्यों में UCC लागू करने के बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
अमित शाह ने मुंबई में कहा था कि कई राज्यों में UCC लागू किया जा चुका है और उन्हें भरोसा है कि 2029 से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू कर दिया जाएगा। बीजेपी इसे समानता और एक समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में अहम कदम बता रही है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना
अमित शाह के बयान के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने UCC को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर फैसला लेने से पहले समाज के अलग-अलग वर्गों और राजनीतिक दलों के बीच व्यापक चर्चा जरूरी है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में UCC का मुद्दा खास महत्व रखता है। बीजेपी की ओर से राज्य में भी इसे लागू किए जाने के संकेत दिए जा चुके हैं। यूपी सरकार के मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी कहा है कि UCC बीजेपी के घोषणा पत्र और संकल्प पत्र का हिस्सा है और प्रदेश में इसे लागू करने को लेकर सरकार फैसला ले सकती है।
जनता समझ रही है भाजपा जिस यूसीसी की बात कर रही है दरअसल उसकी Full Form कुछ और है :
UCC =
Underground Communal Conspiracy
हम तो बस इतना कहेंगे :
पहले पिछले वादे निभाओ
यूसीसी फिर बाद में लाओ
नया जुमला न लेकर आओ
और न जनता को बहकाओ
15 लाख खाते में पहुँचाओ
यूसीसी फिर बाद में…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 15, 2026
ओवैसी ने भी जताई कड़ी आपत्ति
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के नाम पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता और समानता से जुड़े अधिकारों का हवाला देते हुए सरकार के प्रस्ताव पर सवाल उठाए।
ओवैसी ने यह भी सवाल उठाया कि अगर UCC का उद्देश्य पूरी तरह समान कानून लागू करना है तो अलग-अलग राज्यों में मौजूद विशेष कानूनी प्रावधानों को लेकर सरकार का क्या रुख है। उन्होंने गोवा का उदाहरण देते हुए केंद्र सरकार को वहां के प्रावधानों पर भी स्पष्टता देने की चुनौती दी।
NDA के अंदर भी सामने आई अलग-अलग राय
UCC को लेकर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि NDA के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। बिहार में JDU ने कहा है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर UCC पर चर्चा के पक्ष में है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने को लेकर उसकी सहमति नहीं है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस मुद्दे पर अमित शाह से मुलाकात की बात कही है।
वहीं, TDP और चिराग पासवान की ओर से भी जल्दबाजी के बजाय प्रस्ताव और उसके प्रभावों पर चर्चा की जरूरत बताई गई है। इससे साफ है कि 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य सरकार के लिए राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ी चुनौती हो सकता है।
2029 से पहले UCC पर बढ़ेगी सियासी बहस
UCC के तहत शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों के मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग नियमों की जगह समान कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव है। केंद्र सरकार इसे समानता और सामाजिक न्याय से जोड़ती है, जबकि विरोधी दलों और कुछ संगठनों को इसके सामाजिक और धार्मिक प्रभावों को लेकर आपत्तियां हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में UCC सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक विषय भी बन सकता है। खासकर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।