कांग्रेस के पूर्व नेता और सांसद सज्जन कुमार का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वे 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल मृत अवस्था में लाया गया था।
पिछले 7 साल से तिहाड़ जेल में थे बंद
सज्जन कुमार बीते सात वर्षों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे। अप्रैल 2026 में उन्होंने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था। दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में उन्हें 27 अप्रैल 2022 को जमानत मिल गई थी, लेकिन दूसरे मामले में दोषी करार दिए जाने के चलते वे जेल में ही बंद रहे।
1984 दंगों में मिली थी आजीवन कारावास की सजा
सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने उन्हें जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुंदीप सिंह की हत्या के मामले में भीड़ को उकसाने का दोषी पाया था। तीन बार सांसद रह चुके सज्जन कुमार को इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
बेकरी चलाने से सांसद बनने तक का सफर
सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को हुआ था। वे मैट्रिक तक पढ़े थे और राजनीति में आने से पहले बेकरी चलाते थे। 1977 में वे पहली बार दिल्ली नगर निगम में पार्षद बने और बाद में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त हुए। कांग्रेस के टिकट पर 1980 में वे बाहरी दिल्ली सीट से 7वीं लोकसभा के सांसद चुने गए और 1991 में दोबारा यह चुनाव जीता। साल 2004 में उन्होंने रिकॉर्ड 85 लाख से ज्यादा वोटों से बाहरी दिल्ली सीट पर जीत दर्ज की थी। उन्हें संजय गांधी का करीबी माना जाता था।
दोषी करार होते ही छोड़ी कांग्रेस
दिल्ली पुलिस ने 2005 से पहले सज्जन कुमार की सिख विरोधी दंगा मामले में भूमिका की जांच शुरू की थी, जिसे बाद में जस्टिस जीटी नानावती आयोग की सिफारिश पर सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई जांच में उन्हें पुलिस के साथ मिलकर गवाहों के बयानों से अपना नाम हटवाने की साजिश का दोषी पाया गया। 2010 में उन पर हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और हिंसा भड़काने के आरोप लगे। 2013 में जिला अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चला मामला
17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को 1984 के दंगों में उनकी भूमिका के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अगले ही दिन उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।