उत्तर प्रदेश के कौशांबी में हुए कौशांबी पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट के बाद पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। 31 अगस्त को मनौरी बाजार क्षेत्र में हुई इस दर्दनाक घटना में आठ बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी। कई लोग घायल भी हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद फरार चल रहे मुख्य आरोपी नौशाद को पुलिस ने मंगलवार सुबह मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी को चरवा थाना क्षेत्र के 13 मील सराय सहावा रोड के पास घेराबंदी के दौरान पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि घिरने के बाद नौशाद ने टीम पर गोली चलाई, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की। गोली लगने से आरोपी घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
कौशांबी पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट के बाद आरोपी पर शिकंजा
कौशांबी पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की थीं। पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर उसकी तलाश कर रही थी। मंगलवार तड़के आरोपी के भागने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इलाके में घेराबंदी की।
मुठभेड़ के बाद घायल अवस्था में पकड़े गए आरोपी की पहचान नौशाद पुत्र निजामुद्दीन, निवासी मनौरी के रूप में हुई। पुलिस अब इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
400 मीटर दूर बने पटाखा गोदाम पर चला बुलडोजर
हादसे के बाद प्रशासन ने सिर्फ गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। आरोपी नौशाद के उस पटाखा गोदाम को भी जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया, जो घटनास्थल से करीब 400 मीटर की दूरी पर बताया गया है।
डीएम अमित पाल के निर्देश पर देर शाम यह कार्रवाई की गई। प्रशासन के मुताबिक, हादसे के बाद गोदाम की जांच की गई और इसके बाद उसे जमींदोज कर दिया गया। डीएम ने आरोपी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत कार्रवाई की बात भी कही है।
लाइसेंस 2024 में रद्द, फिर कैसे चल रही थी फैक्टरी?
कौशांबी पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट में सामने आई सबसे गंभीर जानकारी फैक्टरी के लाइसेंस से जुड़ी है। अधिकारियों के अनुसार फैक्टरी का लाइसेंस वर्ष 2024 में ही रद्द हो चुका था। इसके बावजूद वहां पटाखों से जुड़ा काम कैसे जारी रहा, अब इसकी जांच की जाएगी।
प्रशासन फैक्टरी और गोदाम से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कराने की तैयारी में है। इस जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि लाइसेंस रद्द होने के बाद भी फैक्टरी का संचालन किस तरह होता रहा और संबंधित स्तर पर इसकी निगरानी क्यों नहीं हो सकी।
धमाका इतना तेज कि आसपास के घर भी हुए क्षतिग्रस्त
31 अगस्त की दोपहर मनौरी बाजार में पटाखा फैक्टरी में अचानक आग लग गई। आग लगने के बाद फैक्टरी में रखे पटाखों में लगातार धमाके होने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, धमाकों की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।
कुछ ही देर में पूरा इलाका धुएं से भर गया और आसपास अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट की वजह से फैक्टरी की इमारत पूरी तरह नष्ट हो गई और आसपास के छह घर भी क्षतिग्रस्त हुए। इस घटना में 11 लोगों की मौत हुई, जबकि करीब पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
घायलों को एंबुलेंस नहीं मिली तो चारपाई पर पहुंचाया अस्पताल
कौशांबी पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट के बाद राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। जब समय पर एंबुलेंस नहीं मिली तो स्थानीय लोगों ने पिकअप वाहन की मदद से घायलों को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल पहुंचाया।
स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने पर घायलों को चारपाई पर लादकर अस्पताल ले जाने की बात भी सामने आई है। पिकअप वाहन से चार घायलों को एसआरएन अस्पताल पहुंचाया गया था। इनमें 13 वर्षीय प्रवीण सिंह और पांच वर्षीय प्रांजली की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई।
दो साल में दूसरी बड़ी घटना, फिर उठे निगरानी पर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब कौशांबी और आसपास के क्षेत्र में पटाखा कारोबार से जुड़ा बड़ा हादसा सामने आया हो। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में भरवारी में भी पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट हुआ था। उस घटना में सात लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।
अब दो साल के भीतर इसी तरह की दूसरी बड़ी घटना ने प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुद्दा केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि कार्रवाई के बाद ऐसे कारोबार को दोबारा शुरू होने से कैसे रोका जाए।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
कौशांबी पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट की जांच में अब कई पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। सबसे बड़ा सवाल फैक्टरी के लाइसेंस से जुड़ा है। जब लाइसेंस 2024 में रद्द हो चुका था, तो इसके बाद गतिविधियां कैसे जारी रहीं, यह जांच का अहम बिंदु होगा।
इसके अलावा पटाखों के भंडारण, गोदाम के इस्तेमाल और घटना से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
फिलहाल प्रशासन ने आरोपी के गोदाम को ध्वस्त कर दिया है और पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस पूरे मामले में लापरवाही कहां हुई और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
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